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दोस्तों की मदद से भारत के बेटे ने प्रतियोगिता में लिया हिस्सा और थाईलैंड से जीत लाया स्वर्ण

Mon, 12 Aug 2019 04:50 PM IST
Prachi Priyam देवेन्द्र सिसोदिया, अमर उजाला, हापुड़
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विनोद राणा - फोटो : अमर उजाला
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अपनी प्रतिभा के दम पर हर बार इतिहास रचने वाले रिकॉर्डधारी मार्शल आर्ट वुशु वर्ल्ड चैम्पियन विनोद राणा ने एक बार फिर थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित जूत्सू ओपन ग्राउंड प्रिक्स 2019 में स्वर्ण पदक जीत कर साठा चौरासी ही नहीं देश का भी नाम रोशन किया है। साठा चौरासी की देवभूमि सपनावत गाँव के सपूत विनोद राणा ने मार्शल आर्ट वुशु में अपनी प्रतिभा का डंका बजा कर आसमां छूने की हसरत पूरी करते हुए एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाइ कर लिया है। 

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सरकारी उपेक्षा का शिकार और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के बाद सामाजिक संगठन और समाज सेवियों के सहयोग से विनोद राणा लगातार जनता की उम्मीद को विश्वास में तब्दील कर कदम दर कदम सफलता के सोपान तय कर आगामी ओलंपिक खेलों में देश की झोली में स्वर्ण पदक डालने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। गरीबी का दंश झेलते हुए भी विनोद राणा चार साल से लगातार गांव से लेकर देश तक अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। 

विनोद राणा विश्व की सबसे व्यापक युद्ध कला मार्शल आर्ट की वुशु विधा में चार साल पहले अपनी दमदार प्रतिभा से मुंबई के प्रियदर्शनी इंदिरा गाँधी स्टेडियम में 2015 में आयोजित पांच दिवसीय प्रतियोगिता में वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक जीत कर झंडे गाड़ कर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। 
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इस प्रतियोगिता में  विश्व के आठ देशों अमेरिका, जर्मनी, श्रीलंका, ईरान, नेपाल, बर्मा, भारत और अफगानिस्तान के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। जनपद हापुड़ के मार्शल आर्ट खिलाड़ी विनोद राणा ने 70 किलोग्राम वर्ग किक बॉक्सिंग (सोनसु) व वुशु स्पर्धा में ईरान के खिलाड़ी मसरूर जाफरी को हराकर स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचा था। 

पांच दिवसीय प्रतियोगिता में 45 प्रकार की विधाओं के खिलाड़ियों ने अपने-अपने हुनर का जलवा बिखेरा था। विनोद राणा पंजाब के जालंधर  स्थित सी डब्ल्यूई कन्टीनेंटल रेसलिंग इन्टरटेन्मेंट में डब्ल्यू डब्ल्यू ई वर्ल्ड चैंपियन द ग्रेट खली के नेतृत्व में छ: माह की ट्रेनिंग भी ग्रहण कर चुके हैं। गाजियाबाद के महामाया स्टेडियम में वर्षों तक वुशू कुंगफू की तैयारी करने के बाद जुलाई 2015 में उन्होंने वुशू कुंगफू की स्टेट प्रतियोगिता में जीत हासिल की थी। उन्होंने बताया कि अब से पहले वह 2010 में राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक और ताइक्वांडो में सिलवर पदक जीत कर नाम रोशन कर चुके हैं। मध्यप्रदेश में दो दिवसीय 15वें राष्ट्रीय वुशु कुंगफू महोत्सव में स्वर्ण पदक जीत कर जीत दर्ज करा चुके हैं।

जनपद हापुड़ की तहसील धौलाना के गांव सपनावत में एक निर्धन परिवार में जन्मे विनोद राणा का मानना है कि ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाओं को यदि सही अवसर मिल जाए तो वह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। सपनावत निवासी किसान परिवार के होनहार सपूत विनोद राणा ने बताया कि वह आर्थिक संकट की मार से जूझ कर अपने जुनून को जीत में बदलने का जज्बा रखने वाले जिंदादिल विनोद का हौसला ही उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित करता है।

विनोद कुमार का कहना है कि उनका सपना अंतर्राष्ट्रीय खेलों में देश का नाम रोशन करना है। पिता महमबीर सिंह गांव में ही खेती करते हैं। एमबीए, एमकाॅम कर चुके विनोद गरीबी के अभाव मेें भी अपनी हिम्मत को बरकरार रखते हुए अपने सपने को साकार करने की दिशा में दिन रात मेहनत करते हैं।

 

स्वयं को बचाने की कला है जू -जित्सू

विनोद राणा - फोटो : अमर उजाला
जू जित्सू कला का जन्म जापान में हुआ बिना हथियार के होने पर आक्रमण से स्वयं को बचाने की कला को जू-जित्सू कहते हैं। जापान में इसे वर्षों से खेल के रूप में अपनाया गया हैं।इस कला में शारीरिक शक्ति के स्थान पर शरीर के घुमाव या लचीलेपन का महत्व होता है। जू -जित्सू की कला ताकतवर मांसपेशियों या तंदुरुस्त शरीर की कोई प्रतियोगिता नहीं है, वरन आत्मरक्षा की ही कला है। जू-जित्सू की दो विधियां हैं, एक तो बिना हथियार प्रतिद्धंदी का सामना करना और दूसरी हथियार वाले प्रतिद्धदी पर हावी होना।

 
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युवाओं ने की मदद, विनोद दिया स्वर्ण पदक

विनोद राणा - फोटो : अमर उजाला
आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजर रहे विनोद सिसोदिया ने आर्थिक स्थिति को दरकिनार कर अपनी मेहनत और लगन से एक बार फिर मदद करने वाले दोस्तों की उम्मीद को साकार कर स्वर्ण पदक लाकर देश का नाम रोशन किया है। इसमें शिरकत करने के लिए क्षेत्र के युवाओं ने व्हॉट्सएप पर तीन अगस्त को इमिडेट हेल्प टू विनोद राणा के नाम से ग्रुप बनाकर 8 अगस्त तक पेटियम पर आर्थिक सहयोग का अभियान चलाया। 

पांंच दिन में भारी भरकम रकम जुटाकर ग्रुप संचालक व करणी सेना के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह तोमर की अगुवाई उन्हें एशियन वुशु चैंपियनशिप के लिए 8 अगस्त को बैंकॉक भेजा । इस अभियान में ग्रुप में शामिल लोगों ने पेटियम पर आर्थिक मदद करके सहयोग की  मिसाल पेश की।  सरकार की खिलाड़ियों के प्रति बरती जा रही उदासीनता पर यह मिसाल करारा जवाब है। विनोद राणा ने बताया कि थाईलैंड की सरजमीं पर जब उनकी जीत पर राष्ट्रगान गूंंजा तो वह अभिभूत हो उठे। 

युवाओं के सहयोग से जूत्सू ओपन ग्राउंड प्रिक्स 2019 में स्वर्ण पदक जीतने वाले विनोद राणा ने बताया कि वह इस प्रति स्पर्धा की जीत के बाद अब वह एशियन गेम्स में चैम्पियनशिप के लिए आगामी नंवबर माह में दस दिवसीय 14-24 नवंबर तक होने वाली विश्व चैम्पियनशिप के लिए मैदान में उतरेगें। आगामी विश्व चैम्पियनशिप आबूधाबी में आयोजित होगी।
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