दिसंबर के दूसरे पखवाड़े पूरे उत्तर भारत ने सर्दी का रिकार्ड तोड़ सितम झेला। कई मौतें हुईं तो सैकड़ों बीमार हो गए। हरेक शख्स का एक ही सवाल था.. आखिर ये जानलेवा सर्दी कब तक..? लेकिन मौसम विभाग की कोई बड़ी एडवांस लैब नहीं होने से इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल रही थी।
आज से शुरू हो रहे नये वर्ष 2020 में इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा। इस वर्ष अलीगढ़ को वैसे तो कई सौगातें मिलेंगी, लेकिन सबसे बड़ी सौगात मौसम की सटीक भविष्यवाणी होगी। अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के फुटबाल ग्राउंड के पास से एक एडवांस बैलून लैब जमीन से 35 किमी की ऊंचाई पर हवा में लहराएगी।
ये ऊंचाई इतनी होगी कि कोई भी शख्स इसको एडवांस दूरबीन के बिना देख तक नहीं पाएगा। एएमयू के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि ये लैब अलीगढ़ से 100 किमी के दायरे के मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम होगी।
इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (इसरो) ने इसको स्थापित करने के लिए पूरे उत्तर भारत में एएमयू को चुना है। ये उत्तर भारत में अपनी तरह की पहली एडवांस लैब है। इसकी स्थापना आगामी 15 जनवरी से शुरू हो जाएगी।
प्रो. सिद्दीकी ने बताया कि पृथ्वी के वातावरण के पहले स्तर ट्रोपोस्फियर और दूसरे स्तर स्ट्रैटो स्फियर के बीच ये बैलून लैब अपना काम करेगी। ट्रोपोस्फियर पृथ्वी की सतह से 18 किमी की ऊंचाई तक होता है। सबसे अधिक बादल, कोहरा, स्माग, प्रदूषण इसी स्तर तक रहता है।
जिसकी वजह से अक्सर घरेलू हवाई उड़ानें इसी स्तर का मौसम गड़बड़ाने से रद्द होती हैं। इसके बाद स्ट्रैटो स्फियर का दूसरा स्तर आता है, जो 18 किमी से ऊपर और 50 किमी की ऊंचाई तक रहता है।
इंटरनेशनल उड़ानें इसी दायरे में होती है, इसलिए थोड़ा बहुत मौसम गड़बड़ाने पर ये उड़ानें रद्द नहीं होती है। बैलून लैब इन दोनों स्तरों के बीच 35 किमी की ऊंचाई पर अपना काम करेगी। जिससे वह नीचे के ट्रोपोस्फियर के मौसम की सटीक जानकारी करेगी और स्ट्रैटो स्फियर में होने वाले वातावरण के बदलाव को भी बताएगी।
इस गुब्बारे के अंदर कई तरह के एडवांस सेंसर लगे रहेंगे। ये सेंसर तापमान, बारिश की संभावना, बारिश की संभावित मात्रा, कोहरा, प्रदूषण, स्माग, आंधी, तूफान, हवाओं की रफ्तार उनको दबाव, पश्चिमी विक्षोभ आदि की सटीक जानकारी एक फ्रीक्वेंसी के माध्यम से नीचे भूगोल विभाग में लगे कंट्रोल रूम में भेजेंगे।
कंट्रोल रूम में लगे एडवांस साफ्टवेयर इस फ्रीक्वेंसी को रीड कर उसका डाटा तैयार कर देंगे। यही डाटा मौसम का पूर्वानुमान होगा। अलीगढ़ के पास जेवर में बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी जरूरत के अनुसार, इस डाटा से मौसम का पूर्वानुमान दिया जा सकेगा।
किसानों को भी इससे बहुत मदद मिलेगी। आम आदमी भी मौसम की सही जानकारी कर सकेगा। अमेरिका में कई तरह के तूफान में इसी तरह की लैब का इस्तेमाल तक आम आदमी को मीडिया के माध्यम से कई तरह की जानकारी दी जा रही है।
पहली फरवरी को होगी मौसम पर नेशनल कांफ्रेंस
अलीगढ़। आगामी पहली और दूसरी फरवरी को एएमयू के भूगोल विभाग में ‘इंपैक्ट ऑफ क्लाईमेट चेंज आन फूड, वॉटर एंड हेल्थ : ईश्यू एंड चैलेंज’ (मौसम में आ रहे बदलाव से खाद्य, पानी एवं स्वास्थ्य पर असर) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस होने जा रही है। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में इसरो के पूर्व अंतरिम चेयरमैन (वर्ष 2014-15) डा. शैलेष नायक मौजूद रहेंगें।