धर्म के नाम पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की बिल्कुल अनुमति नहीं दी जा सकती। यह भी एक तरह से अपराध ही है। अतिक्रमण में शामिल प्रत्येक शख्स के साथ सख्ती से निबटने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने करोल बाग स्थित 108 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा मामले की सुनवाई करते हुए की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एमसीडी से पूछा कि मूर्ति को उसके स्थान से दूसरी जगह शिफ्ट करने संबंधी आदेश पर क्या कदम उठाया गया है। कोर्ट को बताया गया कि इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कोर्ट ने कहा, अब तक यह भी पता नहीं लगा है कि यहां पर अवैध व अनधिकृत निर्माण किन अधिकारियों की शह पर हुआ। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा अगर जांच एजेंसी इस मामले में अधिकारियों को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाती है तो उसकी फास्ट ट्रैक सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन को न्याय मित्र नियुक्त किया है। मामले की सुनवाई के लिए छह सितंबर की तारीख तय की गई है।
ये है मामला
हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए धार्मिक स्थलों का मुद्दा उठाया। इस दौरान हनुमान प्रतिमा व उसके आसपास सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा सामने आया था। हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर 2017 को इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। उधर, अतिक्रमण का बचाव करते हुए मंदिर ट्रस्ट ने कहा था कि यह हनुमान मूर्ति दिल्ली की पहचान है।