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राम दूत हनुमान ने सोने की लंका को जलाकर किया खाक

Tue, 20 Oct 2015 07:11 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
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मैया सीता की खोज के लिए श्रीराम के दूत हनुमान लंका को रवाना होते हैं। रास्ते में सुरसा ने उनका रास्ता रोका। वह बुद्धिमानी से उसे छका आगे निकल जाते हैं।
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उधर अशोक वाटिका में दुखी बैठी सीता के पास रावण पहुंचता है। जैसे ही मंच पर यह दृश्य प्रस्तुत होता है दर्शक बिल्कुल शांत हो जाते हैं। रावण सीता से कहता है ‘सुन सीते चंद्रमुखी चपल नयन चित चोर, एक बार अनुराग से तू देख ले मेरी ओर। इसके बाद दोनों ओर से संवादों की झड़ी लग जाती है।

गुस्से में भरे रावण के जाने के बाद अशोक वाटिका में हनुमान श्रीराम प्रदत्त मुद्रिका को नीचे गिराते हैं। ‘तब देखी मुद्रिका मनोहर, राम नाम अंकित अति सुंदर, चकित चितव मुदरी पहिचानी हरष बिषाद हृदय अकुलानी’। हनुमान प्रकट हो सीता को सारा वृत्तांत सुनाते हैं। इसके बाद हनुमान अशोक वाटिका में फल खाने की सीता से आज्ञा मांगते हैं।
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सीता की आज्ञा पा हनुमान अशोक वाटिका में पहुंच फल खाते समय वन उजाड़ने लगते हैं। यह देख वाटिका रक्षकों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जिन्हें हनुमान ने मार गिराया।

रावण के पुत्र अक्षय कुमार को भी वह स्वर्ग लोक पहुंचा देते हैं। अंत में मेधनाथ उन्हें ब्रह्मास्त्र में बांध रावण के दरबार में ले जाता है। दरबार में रावण और हनुमान के बीच लंबा संवाद होता है। दर्शकों ने इसका भरपूर आनंद लिया।

हनुमान जी रावण को समझाते हैं कि वह श्रीराम से माफी मांग सीता को वापस कर दे। इस पर रावण क्रोधित हो जाता है। रावण हनुमान जी को मृत्युदंड सुनाता है। इस पर विभीषण उसे ऐसा करने से मना करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी दूत को मारना न्यायसंगत नहीं है।

इसके बाद हनुमान की पूंछ में आग लगाने की सलाह दी जाती है। जैसे ही हनुमान की पूंछ में आग लगाई जाती है, वह इस भवन से उस भवन पर कूदकर सोने की लंका को जला डालते हैं। सिर्फ विभिषण का निवास ही बचता है। दर्शकों ने इस दृश्य का खूब आनंद उठाया। रावण की सोने की लंका जलकर राख हो गई।
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