निजी सिक्योरिटी कंपनी एक्सिस बैंक का कैश एटीएम और बैंक की शाखाओं में इधर से उधर ले जाने का काम करती है। बृहस्पतिवार दोपहर विकासपुरी स्थित एक्सिस बैंक की शाखा से कंपनी के कर्मचारी चार अलग-अलग वैन में 38 करोड़ रुपये लेकर ओखला स्थित दफ्तर के लिए निकले थे।
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प्रदीप शुक्ला और विनय की वैन में 22.50 करोड़ रुपये थे। इनके साथ कंपनी के दो और कर्मचारी थे, लेकिन दोनों रास्ते में उतर गए। इसके बाद विनय और प्रदीप कैश लेकर ओखला के लिए निकल गए।
दोपहर करीब 3:30 बजे वैन ओखला मंडी के पास पहुंची तो विनय ने लघुशंका की बात कही। विनय के गाड़ी से उतरते ही प्रदीप वैन लेकर फरार होने लगा। प्रदीप को वैन ले जाता देखकर विनय ने उसके मोबाइल पर कॉल किया।
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काफी देर तक जब प्रदीप वापस नहीं लौटा तो हुआ शक
प्रदीप ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस वाले उसे यहां रुकने नहीं दे रहे हैं, इसलिए वह कालकाजी मंदिर के पास से यूटर्न लेकर वापस आ रहा है। इधर, काफी देर तक जब प्रदीप वापस नहीं लौटा तो विनय ने कंपनी के अधिकारियों को सूचना दी।
कुछ ही देर में कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बाद में प्रदीप का नंबर भी स्विच ऑफ हो गया। शक होने पर पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। छानबीन के दौरान पता चला है कि आठवीं पास प्रदीप शुक्ला यूपी के इलाहाबाद का रहने वाला है। देर रात तक पुलिस उसके बारे में और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही थी।
सिर्फ वैन चालक ने नहीं लूटी कैश वैन टीम ने मिलकर दिया अंजाम
दिल्ली में हुई अब तक सबसे बड़ी कैश वैन लूट मामले में पुलिस ने आशंका जताई है कि वारदात को सिर्फ वैन चालक ने नहीं, बल्कि कई लोगों की टीम ने मिलकर अंजाम दिया है।
इसके पीछे किसी संगठित गैंग का हाथ होने की बात से इनकार नहीं किया जा रहा है। विकासपुरी से ओखला के बीच रास्ते में कैश वैन का पीछा किए जाने की बात से भी पुलिस ने इनकार नहीं किया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मोदी मिल के पास लगे सीसीटीवी की फुटेज में एक मिनी ट्रक, कार और बाइक कैश वैन का पीछा करते दिख रही है। यह लोग कौन थे, इनका वारदात से कोई संबंध है या नहीं, फिलहाल इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस ने वैन के रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाना शुरू कर दिया था। कुछ जगहों की फुटेज पुलिस को मिली भी थी, लेकिन पुलिस अधिकारी इसकी जानकारी देने से बचते रहे।
प्रदीप को पता था, वैन में लगा है जीपीएस सिस्टम
सिस सिक्योरिटी कंपनी की जिस वैन से करोड़ों रुपये उड़ाए गए, उस वैन में जीपीएस सिस्टम लगा था। मामले की छानबीन कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदीप इससे अच्छी तरह वाकिफ था।
उसे पता था कि अगर वह कैश वैन को ज्यादा दूर तक ले गया तो जीपीएस की मदद से पकड़ा जाएगा। इसकी वजह से उसने ओखला मंडी से एक किलोमीटर के दायरे में ही वैन से सारा कैश किसी दूसरी गाड़ी में शिफ्ट कर दिया।
पुलिस ने जब जीपीएस सिस्टम से छानबीन की तो पता चला कि वैन गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास लावारिस हालात में खड़ी है। एफएसएल की टीम ने वैन से कुछ सैंपल उठाए हैं। उसके आधार पर मामले की छानबीन की जा रही है।
राजधानी में कैश वैन से करोड़ों रुपये उड़ाने के मामले में निजी सिक्योरिटी कंपनी की लापरवाही सामने आई है। बृहस्पतिवार को विकासपुरी से जब कैश लेकर वैन चली तो इसमें चार लोग मौजूद थे, लेकिन दो लोग रास्ते में उतर गए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम को दो लोगों की सुरक्षा पर छोड़ दिया गया। बार-बार इन कंपनियों को दिशा निर्देश जारी कर सुरक्षा बरतने के लिए कहा जाता है, लेकिन कंपनियां हमेशा लापरवाही बरतती हैं।
देर रात तक पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि प्रदीप का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था या नहीं।