नोटबंदी के बाद साइबर सिटी के एमजी रोड का बाजार ‘कैशलेस’ हो गया है। प्लास्टिक मनी और मोबाइल वॉलेट के जरिये एमजी रोड के बाजार की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है। मॉल की दुकानों से लेकर रेहड़ी पटरी के छोटे दुकान व फास्ट फूड संचालक सभी कैशलेस हो गए हैं।
छोटे दुकानदारों के लिए उनका मोबाइल ही बैंक बन गया है। यहां आने वाले अधिकांश लोग प्लास्टिक मनी से ही खरीददारी करते हैं। बता दें कि नोटबंदी के बाद एमजी रोड का बाजार बहुत अधिक प्रभावित हुआ था। यहां के कारोबार में 30-40 फीसदी तक गिरावट आ गई थी।
छोटे स्टॉल के जरिये मॉल में कमाने खाने वाले लोगों का कारोबार बिल्कुल ठप हो गया था। चाय, फास्ट फूड संचालक, गोलगप्पे बेचने वाले, मेहंदी लगाने वाले, टैरोकार्ड रीडर, पॉपकॉन बेचने वालों का कारोबार चौपट हो गया था।
नोटबंदी के बाद अपने कारोबार को डूबता देख छोटे कारोबारियों ने खुद को अपडेट किया है। मॉल के बाहर चाय-पकौड़ी बेचने वाले पंकज कहते हैं कि नोटबंदी के बाद पहली बार उन्होंने पेटीएम का प्रयोग शुरू किया। इसी से लोग पकौड़े की कीमत देते हैं। अब ठीक-ठाक दुकानदारी होने लगी है।