गर्भावस्था के दौरान निरंतर हार्मोनल थेरेपी ने उसे सुचारु रखने में मदद की। उच्च रक्तचाप और शुगर के कारण उन्होंने आईसीयू में भी 2 दिन बिताए। वह अपने गर्भावस्था के दूसरे महीने में अस्पताल में आई थीं।
यहां उनकी गहन निगरानी के साथ ही चिकित्सकीय स्थितियों के बारे में भी जानकारी हासिल की गई, जिसके आधार पर उनकी गर्भावस्था को आठवें महीने तक सफलतापूर्वक ले जा सके।
इलेक्टिव सिजेरियन सेक्शन के जरिए उनका प्रसव कराया गया। महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। उन्हें नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में रखा गया और लगभग 3 सप्ताह के बाद छुट्टी दे दी गई। डॉ. अमिता शाह ने बताया कि महिला की इच्छा शक्ति मजबूत होने के कारण यह संभव हो पाया है।