लॉकडाउन में घर से काम कर ऊब चुके लोग अब पतंगबाजी में लगे हुए हैं। इस साल पतंग व मांजे की मांग बढ़ी है, लेकिन दुकानदारों को इससे फायदा नहीं हो रहा है। दुकानदारों का कहना है कि पतंग व मांजे की कीमतें बढ़ने के कारण बचत कम हो गई है। लोग बरेली के मांजे को भूल चुके हैं। प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांजे की मांग अधिक हो रही है। साल 2019 में चाइनीज मांजे के कारण दो बाइक सवार समेत 26 पक्षियों की जान आफत में आ गई थी। जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन से लोग घर पर हैं। ज्यादातर संस्थानों ने सुरक्षा के मद्देनजर कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने की बजाय घर से ही कार्य करने के निर्देश दिए हैं। काम के बाद खाली समय को व्यतीत करने के लिए लोगों ने पतंगबाजी शुरू कर दी है।
दुकानदार मनीष ने बताया कि अनलॉक-1 शुरू होते ही पतंग की मांग होने लगी। शुरूआत में उन्होंने बरेली का मांजा बेचा, लेकिन ग्राहक चाइनीज मांजे की मांग करने लगे। उन्होंने बताया कि चाइनीज मांजा पानी में खराब नहीं होता। पिछले साल की तुलना में इस बार मांजे व पतंग के दाम में 50 फीसदी तक इजाफा हुआ है। ग्राहक अधिक रुपये देना नहीं चाहता। दुकानदारों को अपना लाभ कम करना पड़ा। 100 रुपये में 80 गज बिक्री होने वाला मांजा इस बार 200 रुपये तक पहुंच गया। 3 रुपये में मिलने वाली पतंग 5 में पहुंच गई। इस बार बाजार में 3 रुपये से 100 रुपये तक की पतंग उपलब्ध हो रही है। समोसा, चील, लालटेन पतंगें भी लोगों को खूब लुभा रही हैं।
चाइनीज मांजे से पक्षी समेत लोगों की जान को खतरा
साल 2019 में चाइनीज मांजे से दो बाइक सवार बसई रोड व पटौदी में घायल हुए थे। बाइक पर जाते हुए मांजे से दोनों बाइक सवारों की गर्दन कट गई थी। गनीमत यह रही कि समय पर उपचार मिलने के कारण उनकी जान बच गई। वहीं आसमान में उड़ते हुए परिंदे भी मांजे में अटक जाते हैं। इससे उनके पंख, गर्दन कटने जैसी घटनाएं सामने आती है। साल 2019 में सदर बाजार स्थित धर्मार्थ पक्षी चिकित्सालय व साढराणा पशु-पक्षी अस्पताल में 26 घायल पक्षियों को उपचार दिया गया।