आर्बरेटम, अरावली मूल प्रजाति की नर्सरी और व्याख्यान केंद्र की आधारशिला रखी
तीन दिवसीय अरावली ग्रीन वॉल पार्टनरशिप शिखर सम्मेलन का दूसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली ग्रीन वॉल पर काम अब शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने बीएसएफ के भोंडसी स्थित नेचर कैंप में अरावली के मूल पेड़ और दुर्लभ पेड़-पौधों के संरक्षण के लिए बनाए जा रहे आर्बरेटम, देशी पौधों की नर्सरी और अरावली व्याख्यान केंद्र की आधारशिला रखी।
केंद्रीय मंत्री राज्य जैव विविधता बोर्ड और द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया सॉल्यूशंस के तत्वावधान में आयोजित अरावली ग्रीन वॉल पार्टनरशिप शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुग्राम पहुंचे थे। अरावली पर्वत शृंखला में क्षरित भूमि के पुनर्वास, भूजल स्तर में बढ़ोतरी, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ाने और स्थायी भूमि उपयोग के लिए सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से गुरुग्राम में तीन दिवसीय अरावली ग्रीन वॉल पार्टनरशिप शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में आर्बरेटम, अरावली के मूल पौधों की नर्सरी और अरावली व्याख्यान केंद्र अरावली ग्रीन वाॅल प्रोजेक्ट के साथ अरावली जंगल सफारी और अंडमान निकोबार प्रतिपूर्ति योजना जैसी पौधरोपण और वन संरक्षण की योजना का हिस्सा होंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि यदि हम प्रकृति को उसके तरीके से धैर्यपूर्वक रूप में विकसित होने देंगे तो निश्चित रूप से मानव जाति को इसका सकारात्मक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अरावली के संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास में हम सभी को अपना योगदान करना चाहिए। अरावली ग्रीन वाल परियोजना के तहत भविष्य में गुरुग्राम और आस-पास के जिलों की सामाजिक, धार्मिक, शिक्षण और अन्य संस्थाएं मिलकर अरावली के विकास में कार्य करेंगे। इससे क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ग्रीन अरावली अभियान को लेकर पूर्णतः सक्रिय है, जिसमें अरावली के विभिन्न चिन्हित बिंदुओं पर ईको रेस्टोरेशन का काम भी सफलता पूर्वक किया गया है।
जल निकायों पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन
प्रदेश के वन, पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट से हरियाली तो बढ़ेगी ही भूजल स्तर में भी सुधार होगा। उन्होंने नागरिकों से जंगल को बचाने में भी सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जंगल प्राकृतिक होते हैं। इसलिए पेड़-पौधे तो लगाए जा सकते हैं, लेकिन जंगल नहीं बनाया जा सकता है। वन विभाग भी इस दिशा में गंभीरता से पहल कर रहा है। आम लोग भी अपने-अपने स्तर से जल संचयन के लिए प्रयास करें और इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने गुरुग्राम शहर के जल निकायों पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। सम्मेलन में अरावली संरक्षण के लिए सहयोग के रूप में हरियाणा सरकार के राज्य वन विभाग और सांकला फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार में महानिदेशक एसके अवस्थी, राज्य जैव विविधता बोर्ड, पीसीसीएफ के सह सदस्य सचिव डॉ. विवेक सक्सेना, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विनीत गर्ग, द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया सॉल्यूशंस (एनसीआईएस) की प्रबंध निदेशक डॉ. अंजलि आचार्य, हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष रणदीप सिंह जौहर गुरुग्राम मंडल के वन संरक्षक डॉ. सुभाष यादव सहित कई विशेषज्ञ मौजूद थे।
क्यों महत्वपूर्ण है अरावली की ग्रीन वॉल
पश्चिम के रेगिस्तान और पूर्व के मैदानों के बीच सीना तान कर खड़ी अरावली की प्राचीनतम पर्वतमाला का अवैध क्षरण जहां तेजी से हुआ है, वहीं हरियाणा की जमीन भी मरुस्थल होने लगी है। इस अवैध खनन के कारण थार के रेगिस्तान को रोकने में अरावली की यह पर्वतमाला अब हांफती नजर आ रही है। भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन इसरो की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है कि हरियाणा राज्य के कुल क्षेत्रफल का करीब 8.2 फीसदी हिस्सा सूख चुका है। यानी करीब 3.6 लाख हेक्टेयर जमीन मरुस्थल बनने लगी है। हिसार जिले में स्थित भादरा गांव की रेतीली होती जा रही जमीन इसका जीता जागता प्रमाण है। भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित अरावली पर्वत श्रृंखला गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर लगभग 692 किमी तक फैली हुई है। इसी अरावली का क्षरण रोकने के लिए अब गुजरात से दिल्ली तक पेड़-पौधे लगाकर पांच किलोमीटर चौड़ी हरित दीवार बनाने की योजना है।