सात दिन में पूरी होंगी सभी औपचारिकताएं, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिया निर्देश
अरावली की तलहटी में 10 हजार एकड़ जमीन पर बनेगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। प्रदेश के गुरुग्राम और नूंह में अरावली की तलहटी में बनने वाले दुनिया के सबसे बड़े जंगल सफारी पार्क के संबंध में काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए सात दिनों में सभी सरकारी विभाग औपचारिकताओं को पूरा कर लेंगे। इस संबंध में बुधवार को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए। इस जंगल सफारी के बनने के बाद न केवल गुरुग्राम और नूंह जिले के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अरावली पर्वत शृंखला को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी।
मनोहर लाल ने कहा कि जंगल सफारी पार्क को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण को पूरा करने के लिए लगभग दो साल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जैव विविधता पार्क अवधारणा के अनुरूप एक सफारी पार्क विकसित करने के विकास के लिए डिजाइन परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए दो चरण की निविदा प्रक्रिया अपनाई गई हैं। इस प्रक्रिया में ऐसी सुविधाओं के डिजाइन व संचालन में अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली दो कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट किया गया। बुधवार को एक कंपनी द्वारा इस पार्क को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया गया। जल्द ही प्री-मॉनिटरिंग कमेटी (पीएमसी) का चयन कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस जंगल सफारी में सभी प्रकार के जानवर तथा पक्षियों की प्रजातियां लाने का प्रयास है। वन्यजीवों की स्वदेशी प्रजातियों के अलावा हमारी जलवायु में रह सकने वाले विदेश से लाए जा सकने वाले जानवरों पर भी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुल्तानपुर झील की तरह माइग्रेटिड बर्ड के लिए झील की व्यवस्था हो, इस पर भी चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जंगल सफारी पार्क विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित कर बचाने का भी केंद्र होते हैं।
नीदरलैंड की कंपनी ने दिया प्रस्तुतिकरण
बैठक में विदेशी फर्म के कंसलटेंट नीदरलैंड के एलेक्जेंडर काओराड बरोवर, गोंजालो फरनांडिज होयो, सौरव भयैक ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर, अतिरिक्त प्रधान सचिव व सूचना, लोक संपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के महानिदेशक डॉ. अमित अग्रवाल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली आदि मौजूद रहे।
सफारी में होंगे बिग कैट्स के चार जोन
अरावली पर्वत की इस परियोजना में एक बड़ा हर्पेटेरियम, एवियरी, बर्ड पार्क, बिग कैट्स के चार जोन, शाकाहारी जानवरों के लिए एक बड़ा क्षेत्र होगा। साथ ही विदेशी पशु पक्षियों के लिए एक क्षेत्र, एक अंडरवाटर वर्ल्ड, नेचर ट्रेल्स, विजिटर, टूरिज्म जोन, बॉटनिकल गार्डन, बायोमेस, इक्वाटोरियल, ट्रॉपिकल, कोस्टल, डेजर्ट होंगे।
परियोजना के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ईओआई मंगाई गई थी और ऐसी सुविधाओं के डिजाइन व संचालन में अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली दो कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। वे अब पार्क के डिजाइन, निर्माण की निगरानी और संचालन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता में भाग लेंगे। वहीं, एक अरावली फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी जो परियोजना का प्रबंधन करेगा।
अरावली में 180 प्रजातियों के पक्षी
अरावली पर्वत शृंखला एक सांस्कृतिक धरोहर है, जहां पर पक्षियों, वन्य प्राणियों, तितलियों आदि की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। कुछ वर्षों पहले करवाए गए सर्वे के अनुसार अरावली पर्वत शृंखला में पक्षियों की 180 प्रजातियां, मैमल्स अर्थात स्तनधारी वन्य जीवों की 15 प्रजातियां, रेप्टाइल्स अर्थात जमीन पर रेंगने वाले और पानी में रहने वाले प्राणियों की 29 प्रजातियां और तितलियों की 57 प्रजातियां मौजूद हैं।
राखी गढ़ी संग्रहालय का डिजाइन फाइनल, जल्द नियुक्त होगी पीएमसी
राखी गढ़ी में म्यूजियम बनाने को लेकर भी बुधवार को बैठक की गई, जिसमें राखी गढ़ी की पुरानी सभ्यता को सुरक्षित रखना व उस स्थल को विकसित करने इत्यादि विषयों को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ मिलकर हरियाणा सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साइट संग्रहालय और राखी गढ़ी गांव के भीतर पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए योजना का प्रस्ताव तैयार किया है, जो लगभग फाइनल हो चुका है। बैठक में विभिन्न विषयों की टाइमलाइन तय की गई है। प्री-मॉनिटरिंग कमेटी (पीएमसी) नियुक्त करने के लिए 15 जुलाई तक टेंडर होगा और और 15 अगस्त तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा। दिसंबर माह तक तक संग्रहालय की शुरुआत हो सके, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को तेजी गति से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। भौगोलिक दृष्टि से हरियाणा छोटा राज्य है, लेकिन यहां पुरातत्व से जुड़ी हुई चीजें सबसे ज्यादा पाई जाती हैं। सरस्वती काल की सभ्यता के अवशेष भी हरियाणा के कई स्थानों पर हैं। इन सबको भी संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए सरकार प्रयासरत है।