महिला क्रिकेट के वर्ल्ड कप जीतने पर खिलाड़ियों ने जताई खुशी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दो नवंबर को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीता है। इसके बाद देशभर की महिला खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई उड़ान मिली है। इस प्रेरणा की लहर जिले की महिला क्रिकेटरों में भी साफ दिखाई दे रही है। जीत के इस जश्न के बीच जिले की उभरती महिला क्रिकेटर से खास बातचीत के दौरान उन्होंने मैदान पर अपने संघर्ष, सुविधाओं की कमी और भविष्य के सपनों पर खुलकर बात की।
इन खिलाड़ियों ने बताया कि जहां एक ओर देश में महिला क्रिकेट को अब सम्मान मिलने लगा है। वहीं, स्थानीय स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। फिर भी इन बेटियों ने हार नहीं मानी है, बल्कि अपने जज्बे से जिले को महिला क्रिकेट के मानचित्र पर लाने का बीड़ा उठाया है।
स्थानीय स्तर पर अभी भी कई चुनौती
पहले लड़कियों के क्रिकेट खेलने पर सवाल उठते थे, लेकिन अब लोग तारीफ करते हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी प्रतियोगिताएं बढ़ी हैं। हां पुरुषों जितना सपोर्ट अभी नहीं मिलता, लेकिन शुरुआत हो चुकी है। - राखी
मैंने क्रिकेट की शुरुआत टीवी पर भारत की महिला टीम को देखकर की। स्मृति मंधाना को देखकर लगा कि अगर वो कर सकती है, तो मैं क्यों नहीं। अब मैं भी स्टेट टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं। - संजना
अब लड़कियों और लड़कों के बीच का अंतर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। अब हमें वही किट, वही सुविधा और वही सम्मान मिलता है जो लड़कों को मिलता है। जिला स्तर पर नई जर्सी और ट्रेनिंग, उपकरण मिलते हैं। कोच भी हमारे साथ बराबरी का व्यवहार करते हैं। - अनन्या राऊत
वनडे विश्व कप जीतने के बाद अब महिला क्रिकेट को भी काफी लोग देखना शुरू करेंगे। अब हर साल ट्रायल्स और कैंप आयोजित किए जाते हैं। जानकारी भी समय पर दी जाती है। इससे नई लड़कियां भी आगे आ रही हैं। - कृतज्ञ
अब ज्यादातर कैंपों में महिला कोच होती हैं, जिससे हमें थोड़ी आसानी होने लगी है। पहले तो हमारे कैंप में ज्यादातर कोच पुरुष ही हुआ करते थे। अब लड़कियां खुलकर सीखती हैं और अपनी समस्याएं बताती हैं। - तन्नु चौधरी