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तकनीक के साथ बढ़ रहे सफेदपोश अपराधी : अदालत

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विराट त्यागी
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गुरुग्राम। तकनीक के साथ ही सफेदपोश अपराध करने वालों का एक नया समूह भी विकसित हो रहा है। साइबर अपराध और अपराधियों से सख्ती से निपटना आवश्यक है। यह टिप्पणी अदालत ने सीबीआई अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 23 लाख रुपये ठगी करने में शामिल आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने की। यह आदेश अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने दिया है। आरोपी मूल रूप से मणिपुर के जिला चंदेल निवासी एल माइकिंगकपा मैतेई का रहने वाला है।

सेक्टर-102 निवासी वीरेंद्र सिंह रावत ने साइबर वेस्ट थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 29 जुलाई 2025 को उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उसके और उनकी पत्नी के खातों से 23 लाख अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस को जांच में पता चला कि यह ठगी एक संगठित नेटवर्क द्वारा की गई थी। आरोपी अनस शेख की गिरफ्तारी में दिए गए बयान के आधार पर मुख्य आरोपी एल माइकिंगकपा मैतेई और अन्य के इसमें शामिल होने की बात सामने आई। आरोपी मैतेई को इसी साल 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
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बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी साइबर ठगी की साजिश का अहम हिस्सा है और उसके खिलाफ गुरुग्राम में एक और साइबर अपराध का मामला लंबित है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।
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