गुरुग्राम। खोरी (फरीदाबाद) की अरावली में अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और रुख के बाद (सोहना) गुरुग्राम जिले की सीमा में इस पहाड़ी क्षेत्र में बने 400 से अधिक अवैध फार्म हाउस सुर्खियों में हैं। प्रशासन ने इनको नोटिस देकर चुप्पी साध ली है। कुछ की बाउंड्रीवाल ध्वस्त करके औपचारिकताएं निभाई है। अब देखना है कि प्रशासन इन फार्म हाउस को ध्वस्त कर पाएगा या नहीं।
दूसरी ओर अफसरों का कहना है कि बड़ी कार्रवाई का खाका तैयार किया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि समय समय पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। गुरुग्राम और सोहना प्रशासन करीब एक हजार अवैध निर्माण चिन्हित कर चुके हैं। डीटीवी विभाग और सोहना नगर परिषद द्वारा 250 फार्म हाउस को नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक ये अवैध तरीके से बने हुए हैं। इन फार्म हाउस में रसूखदारों की मोटी रकम लगी है। कुछ फार्म हाउस राजनीतिक दलों के नेता, अधिवक्ता, डॉक्टर, उद्योगपति, खेल जगत व फिल्म जगत की हस्तियों के हैं। अधिकतर ने अपने स्वजन के नाम से प्रॉपर्टी बना रखी है।
पहले भी एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद औपचारिकता निभाते हुए कुछ फार्म हाउस की बाउंड्रीवाल ध्वस्त की गईं थीं। इनके अलावा नगर परिषद सोहना ने 250 फार्म हाउस मालिकों को नोटिस भी जारी किए थे। नगर परिषद सोहना के एमई सुशील ठाकराना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देश पर पहले भी कार्रवाई की जाती रही है। परिषद की ओर से करीब 250 फार्म हाउस के खिलाफ नोटिस दिए गए हैं। अब उन्हें तोड़ने की कार्रवाई आरंभ की जाएगी। अवैध फार्म हाउस यहां पर अब नहीं रह सकेंगे, अन्य को भी तोड़ा जाएगा।
यहां है अधिक अवैध निर्माण
कासन, मानेसर, नौरंगपुर, राठीवास, सकतपुर, गैरतपुर बांस, रायसीना, बंधवाड़ी, ग्वाल पहाड़ी, सोहना, रिठौज और दमदमा में ही करीब 500 से अधिक अवैध फार्म हाउस हैं।
पहले भी बन चुकी है योजना
अरावली के अस्तित्व को बचाने के दिखावे में जुटे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट के सर्वे में ही बताया गया कि यहां 500 से अधिक अवैध फार्म विकसित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों पर इसी साल जनवरी में इन्हें तोड़ने की योजना बनाई, लेकिन योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई। जनवरी मे हुई बैठक में तत्कालीन डीसी ने दो से तीन महीने में अवैध निर्माण तोड़ने का दावा किया। तोड़फोड़ अभियान के लिए बाकायदा एक बैठक भी हुई जिसमें कंट्री एंड टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट, नगर निगम, वन विभाग, डीआरओ, मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट एंड फॉरेस्ट, पॉल्यूूशन डिपार्टमेंट के साथ सोहना नगर परिषद के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन बैठक के बाद तोड़फोड़ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।