अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से विजयदशमी के अवसर पर गुरुग्राम महानगर में 60 से अधिक स्थानों पर शस्त्र पूजन और पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों ने अनुशासित पथ संचलन किया। इसके साथ ही बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से विजयदशमी के ऐतिहासिक महत्व, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर चर्चा की गई।
विश्व संवाद केंद्र के अनुसार, संघ की संगठनात्मक रचना में गुरुग्राम को 18 नगरों में विभाजित किया गया है। सरस्वती नगर में ही 12 स्थानों पर विजयदशमी उत्सव आयोजित किए गए। कुछ स्थानों पर आगामी रविवार को भी पथ संचलन कार्यक्रम होंगे। आयोजन के दौरान प्रचार विभाग की ओर से साहित्य स्टॉल लगाए गए और कन्या पूजन व गृह संपर्क से संबंधित साहित्य वितरित किया गया।
बौद्धिक कार्यक्रमों में वक्ताओं ने विजयदशमी को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण संघ ने इसे अपने छह प्रमुख उत्सवों में शामिल किया है। वक्ताओं ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता के महत्व पर जोर दिया। वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए पंच परिवर्तन को अपनाने का आह्वान किया। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं।