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Gurugram News: पारदर्शी होगी पानी की आपूर्ति, अवैध कनेक्शनों पर कसेगा शिकंजा

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डिजिटल वाटर मैनेजमेंट सिस्टम लागू, स्मार्ट मीटर, जीआईएस मैपिंग समेत कई सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर होंगी उपलब्ध
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नंबर गेम -1.94 लाख उपभोक्ता जुड़े
465 अल्ट्रासोनिक स्मार्ट मीटर लगेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) ने जलापूर्ति एवं सीवरेज सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल वाटर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत नए पानी के कनेक्शन, बिलिंग, शिकायत निवारण, मीटर प्रबंधन, जीआईएस मैपिंग और अवैध कनेक्शनों की पहचान जैसी सभी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है।
बुधवार को निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013 में पीएचईडी से जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था का जिम्मा मिलने के समय नगर निगम के पास करीब 30 हजार मीटर्ड पानी के कनेक्शन थे। अब यह संख्या बढ़कर 1,94,124 सक्रिय जल उपभोक्ताओं तक पहुंच गई है।
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नगर निगम जल वितरण व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए 465 अल्ट्रासोनिक स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही ट्यूबवेल, बूस्टिंग स्टेशन और अन्य जल परिसंपत्तियों की जीआईएस मैपिंग की जा रही है। इससे जल वितरण की बेहतर निगरानी और नॉन-रेवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) में कमी लाने में मदद मिलेगी।
नई डिजिटल प्रणाली के जरिये नागरिक घर बैठे नए जल कनेक्शन के लिए आवेदन, बिल डाउनलोड, भुगतान, विवरण संशोधन, अस्थायी डिस्कनेक्शन, पुनः कनेक्शन और विभिन्न प्रमाणपत्रों जैसी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध होगी व प्रत्येक चरण की ट्रैकिंग भी उपलब्ध रहेगी।
लगाया जा चुका है 5.39 लाख का जुर्माना
नगर निगम ने अवैध पानी के कनेक्शनों और जल दुरुपयोग पर भी सख्ती शुरू कर दी है। अब तक 95 चालान जारी कर 5.39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जबकि, नियमों के विरुद्ध पाए गए 225 जल कनेक्शन काटे जा चुके हैं।
ये सेवाएं मिलेंगी
डिजिटल प्लेटफॉर्म में मोबाइल आधारित मीटर रीडिंग, रियल-टाइम बिल जनरेशन, एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन शिकायत निवारण, ऑडिट ट्रेल और बहु-स्तरीय डिजिटल अनुमोदन जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। इससे सेवाएं अधिक पारदर्शी और तेज होने के साथ विभागीय कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी हुई है।
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बकाया वसूली, बिना बिल वाले क्षेत्रों की पहचान, अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जलापूर्ति नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इससे राजस्व संग्रह बढ़ने के साथ नागरिकों को अधिक विश्वसनीय और बेहतर जल सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। -प्रदीप दहिया, निगमायुक्त
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