- जिला प्रशासन से विधानसभा तक हर बार उठता है मामला, नहीं हुआ ठोस समाधान
- जलभराव के कारण हर साल हजारों पेड़ पौधे सूख जाते हैं
शेरसिंह डागर
नूंह ।
जिले में जलभराव से आमजन परेशान हैं। प्रशासन की तरफ से पानी निकासी के कोई कदम नहीं उठाए गए तो हरियाली को और नुकसान होगा। जलभराव के कारण हर साल हजारों पेड़ पौधे सूख जाते हैं। नूंह शहर व यासीन मेव डिग्री कॉलेज में ही 100 से अधिक पेड़ सूख कर नष्ट हो गए हैं। ये हाल सभी उन जगहों का है जहां जलभराव है। इसके अलावा किसी के मकान में नुकसान हुआ है तो किसी की फसल की बिजाई नहीं हो पाई है। जलभराव के कारण पशुधन पर भी संकट के बादल हैं। गंभीर समस्या पर जिला प्रशासन को संबंधित विभाग से ठोस योजना बनवाने की जरूरत है। प्रशासनिक अधिकारी अभी तक केवल दौरों तक सीमित हैं।
खूब उठा मामला :
यह मामला हर साल जोरशोर से जिला प्रशासन से लेकर विधानसभा तक उठाया जाता है, लेकिन इसका कोई स्थाई समाधान नहीं किया जा रहा। मामला तूल पकड़ने पर संबंधित विभाग केवल कुछ जेनसेट व बिजली की मोटर लगाकर खानापूर्ति व राहत जरूर देता है, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं हो पाया है।
दर्जनों गांवों में अभी से पानी
नूंह, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका शहर के अलावा उलेटा, हसनपुर, गांगोली, दुबालु, किरा, आलदुका, कुर्थला, बाजड़का, घासेड़ा, छपेड़ा, जयसिंहपुर, ढेंकली, उजीना, संगेल, बाबूपुर के अलावा हर खंड के एक दर्जन से अधिक गांव में जलभराव की समस्या अभी से बनने लगी। हजारों एकड़ भूमि हर साल बिना बिजाई के रह जाती है। जिससे किसान की हालत दयनीय बनी हुई है। यह समस्या पिछले एक दशक से बनी हुई है।
वाइएमडी कॉलेज सहित जहां ज्यादा जलभराव है वहां जनरेटर व इंजन से पानी खींचने की कार्यवाही शुरू कर दी है। नूंह शहर में स्थाई समाधान के लिए योजना बनाई गई है। जो अगले वर्ष शुरू होगी। दूसरी जगहों पर भी व्यवस्था करेंगे। -विश्राम मीणा, उपायुक्त नूंह।