प्रतिदिन 1500 टन कचरे से बनाया जाएगा चारकोल, एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड व हरियाणा सरकार के मध्य हुआ एमओयू
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। साइबर सिटी में कूड़े की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश सरकार वेस्ट-टू-ग्रीन कोल प्लांट स्थापित कराने जा रही है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में कचरे से चारकोल बनाने वाले प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें ग्रीन कोल प्लांट भी कहा जाता है। गुरुग्राम के बंधवाड़ी में करीब 20 एकड़ में लगने वाले संयंत्र पर 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये प्लांट भारत में सबसे बड़ा होगा, जहां प्रतिदिन 1500 टन कचरे से चारकोल बनाया जाएगा।
शनिवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शहरी स्थानीय निकाय राज्यमंत्री सुभाष सुधा की उपस्थिति में एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएनएल) तथा नगर निगम, गुरुग्राम और फरीदाबाद के मध्य समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त नरहरि सिंह बांगड़ और एनवीवीएनएल की ओर से सीईओ रेनू नारंग ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि शनिवार का दिन प्रदेश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है, जब ग्रीन चारकोल बनाने के लिए प्लांट हेतु एमओयू हुआ है। समझौते के अनुसार, एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) गुरुग्राम और फरीदाबाद में वेस्ट टू चारकोल प्लांट स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम के बंधवाड़ी में और फरीदाबाद के मोठूका में लगभग 500-500 करोड़ रुपये की लागत से हरित कोयला प्लांट स्थापित किए जाएंगे। दोनों प्लांटों में गुरुग्राम और फरीदाबाद शहरों में एकत्रित 1500- 1500 टन प्रति दिन (टीपीडी) कचरे को चारकोल में बदला जाएगा। दोनों प्लांटों के लिए गुरुग्राम और फरीदाबाद नगर निगमों द्वारा 20-20 एकड़ जमीन दी जाएगी और एनटीपीसी द्वारा जल्द ही जमीनों का कब्जा लेकर प्लांट स्थापित करने का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा, जिनके लगभग 30 माह में पूरा होने की संभावना है। दोनों प्लांट पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित होंगे।
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कचरे के ढेर से मिलेगी मुक्ति
नायब सिंह सैनी ने कहा इन संयंत्रों के स्थापित होने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को मूर्तरूप देने में बड़ी मदद मिलेगी, जिससे गुरुग्राम और फरीदाबाद शहर कचरा मुक्त बनेंगे। भविष्य में शहरों में कचरे के ढेर से भी मुक्ति मिलेगी। गुरुग्राम में वेस्ट-टू-ग्रीन कोल प्लांट स्थापित करने से न केवल कचरे की समस्या का स्थायी समाधान होगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में भी वृद्धि होगी। इस टोरिफाइड चारकोल का उपयोग बिजली उत्पादन संयंत्रों में किया जाएगा, जिससे खनिज कोयले के उपयोग में भी कमी आएगी। यह प्रयास शहरी स्वच्छता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने और दोनों शहरों में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
कचरा प्रबंधन को मिलेगी मजबूती : विकास गुप्ता
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता ने बताया कि बढ़ते शहरीकरण के दौर में लगातार कचरे का सृजन भी बढ़ता जा रहा है, जिससे शहरों में कचरे का निस्तारण एक बड़ी चुनौती बन रही है। इसी समस्या के समाधान हेतु मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में इस दिशा में एनवीवीएन के साथ पहल की है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में इन संयंत्रों के स्थापित होने से कचरा प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी उमाशंकर और मोहम्मद शाइन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
वाराणसी में चला रहा है संयंत्र
एनवीवीएनएल की सीईओ रेनू नारंग ने बताया कि वर्तमान में वाराणसी में एनटीपीसी द्वारा 600 टन प्रतिदिन कचरे से वेस्ट-टू-चारकोल बनाने का प्लांट संचालित किया जा रहा है। हालांकि, हरियाणा में स्थापित होने वाले ये दोनों प्लांट भारत में सबसे बड़े होंगे, जहां प्रतिदिन 1500-1500 टन कचरे से चारकोल बनाया जाएगा। इनकी सफलता के बाद अन्य शहरों में भी इस तकनीक को स्थापित करने का विचार है। इस पहल का उद्देश्य कुशल अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना है, जिसमें बेहतर संग्रह, रीसाइक्लिंग और निपटान के तरीके शामिल हैं।