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सिर्फ चार मिनट में चोरी: लोहे की नुकीली रॉड से तोड़ते थे लॉक, हाईटेक वाहन चोर गिरोह के कारनामे जान पुलिस हैरान

Sat, 08 Jan 2022 08:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम

सार

अपराध शाखा सेक्टर-39 के प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया कि तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वह चोरी के वाहन से ही वारदात को अंजाम देने आते थे। लोहे की नुकीली रॉड को लॉक में घुमाकर लॉक तोड़ देते थे। इसके बाद वाहन चोरी करके ले जाते थे।
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गिरफ्त में वाहन चोर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपराध शाखा सेक्टर-39 की टीम ने दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम और रेवाड़ी में वाहन चोरी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने तीन कार, छह बाइक, लॉक तोड़ने वाला औजार, टॉर्च बरामद की है। गिरोह में 12 सदस्य हैं। 
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पुलिस सरगना समेत फरार अन्य साथियों की तलाश कर रही है।  गिरोह के यह सदस्य तीन मिनट में लॉक तोड़कर चोरी की वारदात कर फरार हो जाते थे। 

एसीपी प्रीतपाल सांगवान ने बताया कि पकड़े गए आरोपी सोहेल निवासी गांव आकेडा थाना सदर नूंह, मौसम खान निवासी गांव महू जलालपुर थाना नगीना, जिला नूंह और अशफाक उर्फ मुल्ला निवासी गांव महू जलालपुर थाना नगीना, जिला नूंह के रहने वाले हैं। 

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह गुरुग्राम, दिल्ली, रेवाड़ी व एनसीआर में चोरी करने के लिए आते थे। उनके निशाने पर अधिकांश ईको कार और बाइक रहती थीं। वारदात को अंजाम देकर वह नूहं ले जाते थे।  एसीपी ने बताया कि अशफाक पूर्व में भी जेल जा चुका है। गिरोह में सरगना समेत 12 लोग हैं। अन्य की तलाश में पुलिस टीम जुट गई है।  
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चंद मिनट में लोहे की नुकीली रॉड से तोड़ते थे लॉक

अपराध शाखा सेक्टर-39 के प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया कि तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वह चोरी के वाहन से ही वारदात को अंजाम देने आते थे। लोहे की नुकीली रॉड को लॉक में घुमाकर लॉक तोड़ देते थे। इसके बाद वाहन चोरी करके ले जाते थे। वारदात करने में आरोपियों को तीन से चार मिनट लगते थे। 

अभी तक इन आरोपियों ने 15 से अधिक वारदात करना कबूल किया है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि सरगना नए युवाओं को रुपयों का प्रलोभन देकर वारदात कराता था। करीब तीन वर्षों से गिरोह सक्रिय है। पूर्व में कई बार सरगना जेल जा चुका है। पुलिस की टीम सरगना की तलाश कर रही है। यह भी जानकारी की जा रही है कि कहीं वाहनों के फर्जी कागज तैयार करके तो नहीं बेचते थे।
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