गुरुग्राम। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा वाहन चालकों को निशुल्क फास्ट टैग उपलब्ध करवाने का दावा फेल हो गया। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48 स्थित खेड़कीदौला टोल प्लाजा के पास लगवाए गए फास्ट टैग कैंप से एनएचएआई कर्मचारी व अधिकारी नदारद रहे। वहीं, बैंक व विभिन्न कंपनियों की तरफ से वाहन चालकों को फास्ट टैग उपलब्ध करवाए गए। इसके लिए बाकायदा कीमत भी वसूली जा रही है। शनिवार को करीब 780 वाहन चालकों ने फास्ट टैग बनवाए।
शनिवार सुबह से ही वाहन चालकों की फास्ट टैग बनवाने के लिए टोल प्लाजा कार्यालय के बाहर लंबी लाइन लगी रही। यहां एनएचएआई की तरफ से निशुल्क फास्ट टैग दिए जाने के लिए कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं दिखा, हालांकि यहां आईडीएफसी बैंक, एयरटेल, पेटीएम व आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से कर्मचारियों को लगाया गया था जो निर्धारित शुल्क लेकर वाहन चालकों को फास्ट टैग दे रहे थे। एनएचएआई की तरफ से वाहन चालकों को फास्ट टैग देने के लिए कोई भी मौजूद नहीं था।
वाहन चालक सुभाष ने बताया कि उन्हें निशुल्क फास्ट टैग देने की बात कही गई थी, लेकिन जब वह यहां पहुंचे तो उनसे फास्ट टैग के नाम पर 200 रुपये लिए गए। इसमें फास्ट टैग में 100 रुपये का बैलेंस मिल रहा है जबकि 100 रुपये फास्ट टैग के नाम पर कंपनी ले रही है। वाहन चालक गौरव ने बताया कि वह फास्ट टैग के लिए आए थे, लेकिन उनसे बैंक कर्मी ने 150 रुपये लिए और टैग में 100 रुपये का बैलेंस दिया। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बैंक पॉलिसी का हवाला देते हुए 50 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज लेने की बात कही।
एनएचएआई के फास्ट टैग खत्म
टोल प्लाजा पर फास्ट टैग दे रहे कर्मियों ने बताया कि एनएचएआई के फास्ट टैग शुक्रवार से ही खत्म हैं। टैग न होने के कारण एनएचएआई की तरफ से कोई नहीं आ रहा है। वहीं, एनएचएआई के परियोजना उप प्रबंधक पुनीत खन्ना को कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने जवाब देना उचित नहीं समझा।
वाहन लाने का बनाते रहे दबाव
फास्ट टैग दे रहे कर्मी वाहन चालकों को मौके पर ही अपनी गाड़ी लेकर आने का दबाव बनाते रहे। हालांकि लोग अपनी गाड़ियों के दस्तावेज लेकर आए थे, लेकिन कर्मचारी यह कहकर उन्हें वापस भेजते रहे कि फास्ट टैग लेना है तो गाड़ी यहां लानी ही होगी।
कागजात पूरे होने के बाद भी नहीं मिला फास्ट टैग
फास्ट टैग लेने में उन वाहन चालकों को दिक्कत आई जिन्होंने गाड़ी कुछ समय पहले खरीदी है और अभी गाड़ी उनके नाम पर ट्रांसफर नहीं हुई। ऐसे में उन्हें फास्ट टैग नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन वाहन चालकों को परेशानी हो रही है जिनकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन दूसरे राज्यों का है।