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बेहतरीन सुविधाओं से लैस होगा टावर ऑफ जस्टिस

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गुरुग्राम में तैयार हो रहा टॉवर ऑफ जस्टिस - फोटो : Gurgaon
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गुरुग्राम। जिले में बन रही टावर ऑफ जस्टिस अदालत बेहतरीन सुविधाओं से लैस होगी। यह प्रदेश की पहली ऐसी जिला अदालत होगी जिसमें मॉल की तरह स्वचालित सीढ़ियां होंगी। लोक निर्माण विभाग ने पहले इसमें लिफ्ट के साथ साधारण सीढ़ियों का प्रावधान किया था। टावर निर्माण का 72 फीसदी कार्य पूरा होने के बाद अब योजना में बदलाव कर स्वचालित सीढ़ियां भी इसमें बनाने की तैयारी है। साथ ही, बेसमेंट में तीन और पार्किंग भी बनेंगी। इससे लागत में 27 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भी होगी।
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अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रदेश की पहली स्वचालित सीढ़ियों वाली जिला अदालत होगी। इससे साइबर सिटी की अलग पहचान बनेगी। वर्तमान में अदालतें, विकास सदन, लघु सचिवालय समेत जिला अदालत परिसर में लगाई जाती हैं। साल 2017 में 79 करोड़ रुपये से लोक निर्माण विभाग को कार्य की अनुमति मिली थी। इसके बाद टावर ऑफ जस्टिस का निर्माण शुरू किया गया। भूतल समेत बेसमेंट में दो पार्किंग बनेंगी। पहली मंजिल पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत होगी। दूसरी से छठे तल तक 10-10 अदालतें बनेंगी। सातवीं मंजिल पर पांच अदालतें होंगी। सबसे ऊपर जज व वकील पुस्तकालय समेत कैंटीन बनेगी। स्वचालित सीढ़ियों के लिए जल्द ही निविदा जारी की जाएगी।
बेसमेंट पार्किंग की निविदा जल्द होगी जारी
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, भूतल और दो बेसमेंट पार्किंग की व्यवस्था बेहद कम है। इसमें न्यायाधीश समेत अदालत में कार्य करने वाले स्टाफ के वाहन ही खड़े किए जा सकते हैं। इसे देखते हुए बेसमेंट की तीन अलग से पार्किंग बनाने की योजना बनाई गई है। इसकी निविदा जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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पुरानी अदालत के पास मुख्य सड़क होगी अदालत का हिस्सा
निर्माण कार्य के कारण वर्तमान में अदालत परिसर के बाहर जिस सड़क को बंद किया गया है, उसेे परिसर का आंतरिक हिस्सा बनाया जाएगा। सभी के लिए अदालत में जाने का रास्ता सोहना रोड से होगा। अधिवक्ता चेंबर पुराने अदालत परिसर में ही रहने से एक अलग रास्ता बनाकर बंद की गई सड़क से जोड़ा जाएगा। इस रास्ते को केवल अधिवक्ताओं के लिए बनाया जाएगा।
टावर ऑफ जस्टिस का निर्माण सितंबर 2021 तक कर लिया जाएगा। पहली बार अदालत परिसर में स्वचालित सीढ़ियों का प्रावधान किया जा रहा है। 27 करोड़ रुपये से अतिरिक्त पार्किंग बनाई जा रही है।
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- राजीव यादव, अधीक्षक अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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