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Gurugram News: उजीना पीएचसी खुद बीमार, कैसे मिलेगा मरीजों को इलाज

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-22 गांवों की 76 हजार आबादी को होती है परेशानी, दवाएं भी नहीं मिलतीं
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संवाद न्यूज एजेंसी , नूंह । करोड़ों रुपये की लागत से लोगों की सेहत बेहतर रखने के लिए बनाई गई उजीना गांव की पीएससी इन दिनों खुद बीमार है। 22 गांवों के 76 हजार की आबादी के लिए बनाए गए इस अस्पताल में इलाज तो क्या मरीज व स्टाफ के लिए शौचालय तक नहीं है। मरीज व स्टाफ को खुले में जाना पड़ रहा है। दवाओं के नाम पर यहां पर चिकित्सक केवल खानापूर्ति करते हैं। खांसी की सिरप तक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध नहीं। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा की उम्मीद करना बेमानी ही होगी।
स्वास्थ्य केंद्र पर अगर कोई घायल हो गया, तो एक पट्टी तक नहीं है। यह पट्टी आपको बाहर दुकान से खरीदकर लानी पड़ेगी। दूसरे को साफ सफाई को संदेश देने वाले विभाग के आंगन में पेड़, फूल पौधों की जगह झाड़ियां उगी हुई है। दंत चिकित्सक के लिए कुर्सी तक नहीं। जो दंत चिकित्सक हैं उसको जिला अस्पताल में कैदियों की सेवा के लिए लगाया हुआ है, एक चिकित्सा विभाग की तरफ से लगाया हुआ है, उनके छुट्टी पर चले जाने के बाद मरीजों की जांच करने वाला कोई नहीं रहता। केंद्र पर पेयजल तक नहीं है, रोजाना स्टाफ को पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।
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डिलीवरी का फायदा मिल रहा :

डिलीवरी केंद्र पर हर माह 125 से भी ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं। यहां पर विभाग की तरफ से चार स्टाफ नर्स लगाई हुई हैं, जो 24 घंटे सेवाएं दे रही हैं। लेकिन यहां पर रात के समय सुरक्षा गार्ड नहीं होने के कारण रात को ड्यूटी देने वाली महिला कर्मी व अन्य कर्मी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती है। केंद्र पर एक सुरक्षा गार्ड है, जो अपनी सेवाएं दिन में देकर चला जाता है।

इन गांवों के लोग आते हैं
इस पीएचसी केंद्र के अधीन उजीना , गुंडबास, बीबीपुर, सुल्तापुर, सेंगेल, जाजूका, कैराका, नौसेरा, अड़बर, रानीका, इस्लामबास, बझेड़ा, देवला, भपावली, कलिंजर, ठेकडा, अलावलपुर, जयसिंहपुर, चिलावली, ढेंकली, बुराका व एक अन्य गांव के लोग यहां पर इलाज के लिए आते हैं।



यहां पर बुखार के इलाज के नाम पर केवल टैबलेट ही दी जाती है, अन्य दवाएं का यहां टोटा है। कई दवाएं बाहर से लानी पड़ती हैं।

- सुमित, उजीना


मरीजों के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर पीने का पानी व शौचालय की व्यवस्था तक नहीं। परिसर में लंबी-लंबी झाडियां उगने लगी हैं।

-अशोक , उजीना
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- स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर यहां पर महज खानापूर्ति होती है, खांसी की दवा व पट्टी तक लोगों को नसीब नहीं हो रही हैं।

मुस्ताक, रानीका
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स्वास्थ्य के नाम लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने से लोगों को परेशानी होती है।

- फारुख, कैराका।



- केंद्र पर जो कमी हैं, उसको लेकर स्वास्थ्य मंत्री से बात करके पीएचसी को सीएचसी का दर्जा दिलाने का प्रयास होगा। दूसरी कर्मियों को लेकर भी जल्द उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।
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-मुनेश फौजी, सरपंच पति।



यहां जो भी समस्याएं हैं उनको प्राथमिकता से दूर कराया जाएगा इस संदर्भ में स्वास्थ्य मंत्री और सिविल सर्जन से बात की जाएगी।

कंवर संजय सिंह पूर्व मंत्री हरियाणा।

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कम संसाधनों में विभाग की तरफ से बेहतर सेवाएं दी जा रही है। कुछ मामलों में उच्च स्तर पर स्वीकृति ली जाती है। फिर भी अगर कहीं पर कोई कमी है, तो उसे ठीक कराया जाएगा। जो भी व्यवस्था संभावित होगी उसे दुरुस्त भी कराया जाएगा।

- डॉ कपिल देव शर्मा, एसएमओ नूंह।



खबर की फोटो कुछ देर में भेज दी जाएंगी
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