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Gurugram News: नौकरी का झांसा और अवैध रूप से विदेश भेजने में दो भाई गिरफ्तार

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चीनी मूल के लोगों के साथ मिलकर देते थे ठगी को अंजाम
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भारत के लोगों को विदेश में ले जाकर कराते थे साइबर ठगी
आरोपियों के खिलाफ नारनौल में भी मामला दर्ज किया गया


संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नौकरी दिलाने का झांसा देकर विदेश भेजने और वहां से अवैध रूप से दूसरे देश भेजकर ठगी का काम कराने के मामले में पुलिस ने दो आरोपी भाइयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार हुए आरोपियों की पहचान भिवानी के बड़वा गांव निवासी विजेंद्र और जितेंद्र के रूप में हुई है।। पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध दक्षिण थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। अब तक आरोपी हरियाणा और राजस्थान के करीब 10 युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

रोहतक के सांघी गांव निवासी मंदीप ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह गुरुग्राम में कादरपुर गांव में निजी कंपनी में काम करते थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के बड़वा गांव निवासी सोनू से हुई थी। सोनू ने उनके घर वालों से विदेश में नौकरी की बात की थी। इसी साल 22 मार्च को सोनू ने उसे जयपुर एयरपोर्ट से टूरिस्ट वीजा देकर थाईलैंड भेज दिया था। पीड़ित ने बताया था कि जब वह थाईलैंड पहुंचा तो वहां पर सोनू का भाई जितेंद्र मिला। जितेंद्र ने उनसे थाईलैंड की करेंसी 1000 थाई वाट ले लिए और गाड़ी में अपने साथ बैठाकर ले गया था। उनका आरोप है कि वहां से उन्हें म्यांमार अवैध तरीके से पहुंचा दिया और वहां पर अमेरिकी नागरिकों की जानकारी एकत्रित कराने का काम करवाया जाता था।
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पुलिस प्रवक्ता संदीप ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि आरोपी जितेंद्र इसी साल जनवरी में म्यांमार गया था वहां पर वह चीनी मूल के लोगों से मिला और ये उनके साथ मिलकर साइबर फ्रॉड करने लगा। इसने अपने भाई विजेंद्र को बताया कि वहां चीनी लोग अवैध तरीके के ठगी के लिए लड़के बुलाते हैं और कमीशन के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के बदले 1000 डॉलर कमीशन देते हैं। एजेंट को अलग से 3000 डॉलर देते हैं। आरोपी विजेंद्र ने पीड़ित मंदीप को अपने भाई जितेंद्र के कहने पर थाईलैंड भेजा और वहां से म्यांमार भेजा था। इसके बदले आरोपी विजेंद्र को 3000 डॉलर और आरोपी जितेंद्र को 1000 डॉलर का कमीशन मिला था। आरोपी विजेंद्र ने बताया कि इसके भाई जितेंद्र के कहने पर वह इसी साल सितम्बर में म्यांमार गया था। 21 अक्तूबर को म्यांमार आर्मी ने इन दोनों को पकड़ लिया और 19 नवंबर को दिल्ली डिपोर्ट किया गया। आरोपियों के खिलाफ नारनौल में भी मामला दर्ज किया गया है।
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