परिवार का आरोप है कि युवती से साफ-सफाई और घरेलू काम लगातार करवाए जाते रहे, लेकिन उसे कभी वेतन नहीं दिया गया। जब भी वह घर लौटने की बात करती उसकी लोकेशन बदल दी जाती थी। करीब हर छह महीने में उसे दूसरी जगह भेज दिया जाता था ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। लगभग दो साल पहले उसे गुरुग्राम लाया गया था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब युवती ने किसी तरह अपने भाई से फोन के जरिए संपर्क किया। इसके बाद उसकी मां ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन पहुंचकर बेटी को मुक्त कराने की गुहार लगाई। झारखंड भवन के नोडल अधिकारी राहुल सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए मिशन मुक्ति फाउंडेशन को पत्र भेजा। संस्था की ओर से एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत मिलने के बाद एनएचआरसी की सदस्य प्रियंक कानूनगो ने तुरंत संज्ञान लिया और गुरुग्राम के पुलिस उपायुक्त ईस्ट, जिला प्रशासन, श्रम विभाग और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए। इसके बाद गठित टीम ने सेक्टर-40 के मकान नंबर 787 में छापेमारी की। मौके पर केवल युवती और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। टीम ने युवती को सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों को सौंप दिया।
एनएचआरसी ने मामले को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए पीड़िता को बकाया वेतन दिलाने और पूरे नेटवर्क की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं युवती को परिजनों से मिलाने में मिशन मुक्ति फांउडेशन के निदेशक विरेंद्र, महिला एवं बाल विकास विभाग, झारखंड सरकार और झारखंड भवन, नई दिल्ली से राहुल, नायब तहसीलदार, श्रम निरीक्षक नरेश कुमार गठित टीम में शामिल रहे।
युवती को सेक्टर 40 से सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों से मुलाकात करा दी गई है। मामले से संबधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए युवती और परिजनों से सेक्टर 40 थाने में जानकारी जुटाई जा रही है। -विरेंद्र, मिशन मुक्ति फांउडेशन, निदेशक