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फर्जी कॉलसेंटर चलाने वाले तीनों आरोपी हैं आईटी एक्सपर्ट, कॉलसेंटर में नौकरी से मिला आईडिया

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फर्जी कॉलसेंटर चलाने वाले तीनों आरोपी हैं आईटी एक्सपर्ट
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गुरुग्राम। उद्योग विहार में सोमवार देर रात पकड़े गए फर्जी कॉलसेंटर को तीन पार्टनर चलाते थे। तीनों ही आईटी एक्सपर्ट हैं और कॉल सेंटरों में नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपना अलग कॉलसेंटर चलाने और ठगी करने की योजना बनाई थी। कॉलसेंटर से पकड़े गए आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से अमरीश चौधरी और अजय मिश्रा को दो दिन के रिमांड पर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार रिमांड के दौरान आरोपियों ने बताया कि उनके साथ तीसरा आरोपी बदायूं उत्तर प्रदेश निवासी विनीत शर्मा है। जिसकी कॉल सेंटर में बराबर की हिस्सेदारी थी। उन्होंने इस कॉल सेंटर में 9 कर्मचारियों को लगाया था जिन्हें 25 से 35 हजार रुपये वेतन दिया जाता था। वेतन देने के लिए उनके समक्ष शर्त रखी जाती थी। उसमें उन्हें लाखों रुपये का टारगेट दिया जाता था। टारगेट से कम ठगी करने वालों का वेतन काट लिया जाता था और अधिक ठगी करने वालों को इंसेंटिव दिया जाता था।
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पुलिस के मुताबिक इस काल सेंटर में कोई कर्मचारी साल भर से ज्यादा नहीं रखा जाता था। वहीं, नए कर्मचारियों को कॉलसेंटर में ही प्रशिक्षण दिया जाता था। इसमें उन्हें जिस देश के लोगों से बात करनी होती है, वहां की भाषा और उच्चारण सिखाया जाता था। साथ ही उन्हें ऐसा नाम दिया जाता था जो उसी देश के लोगों से मिलता जुलता हो।
पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) शशांक कुमार सावन के मुताबिक शिकार फंसाने के बाद आरोपी कंपनी के उपभोक्ताओं से 50 से 150 डालर तक वसूल करते थे। बताया जा रहा है कि यह राशि गिफ्ट वाउचर या प्लेस्टोर कार्ड के जरिए इनके पास आती थी, हालांकि अभी तक इस पैसे का ट्रांजेक्शन मोड स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस इमारत में इनका कॉलसेंटर संचालित हो रहा था, वह किराए पर थी।
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अमेरिकन कंपनी थी 25 फीसदी की सांझेदार
ठगी के लिए लोग पर पॉपअप लिंक भेजते थे। इस लिंक में माइक्रोसॉफ्ट विंडो को लेकर चेतावनी होती थी। लिंक पर क्लिक करते ही कंप्यूटर हैंग हो जाता था और उसी दौरान इस फर्जी कॉलसेंटर का नंबर भी कंप्यूटर स्क्रीन पर डिस्पले हो जाता था। इस नंबर पर संपर्क करने वालों का कंप्यूटर रिमोट पर लेकर उसकी पूरी जानकारी हैक कर लेते थे। इसके साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान करवाने के लिए वह एक अमेरिकी बैंक में ही रकम जमा करवाते थे। यह रकम कई बार यह रकम गिफ्ट बाउचर के रूप में भी वसूल की जाती थी। इसमें शुद्ध मुनाफे का 25 प्रतिशत हिस्सा वह अमेरिकन कंपनी रखती थी जिसमें रुपये जमा करवाए जाते थे।
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