फोटो विश्व रंगमंच दिवस - असुविधाओं के बीच रंगमंच को जीवंत रखने की कोशिश में कलाकारसंवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रंगमंच के लिए मंचीय सुविधा के अभाव में भी वरिष्ठ कलाकार थियेटर को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं। शहर में बड़ा सरकारी ऑडिटोरियम नहीं है, जहां कलाकार नाटकों का आयोजन कर सके। नगर निगम ने सेक्टर 29 में एक छोटा सा मुक्ताकाश मंच बनाया है, जहां आयोजन होते हैं मगर इसका ग्रीन रूम बदहाल हालत में है।
रंगमंच में 1985 में मास्टर डिग्री लेने वाले अभिनेता मोहनकांत बॉलीवुड के एड फिल्मों, दूरदर्शन के टीवी सीरियल, फिल्म डंकी, वेब सीरीज गुप्ता निवास, महारानी में काम कर चुके हैं, उनकी शहर के ओपन एयर थियेटर में नाटकों के मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आचार्य पुरी में रहने वाले महेश ने ऑडिटोरियम के अभाव में अपने घर की छत पर हॉल बनाकर नाटकों का आयोजन किया। पिछले 15 सालों से वे अपने घर की छत के ऑडिटोरियम में नाटकों के आयोजन करा रहे हैं।
वर्जन
सेक्टर 29 के मुक्ताकाश मंच पर थियेटर कलाकारों को जोड़ते हुए नाटकों के मंचन करा रही हूं। कई वरिष्ठ कलाकारों को जोड़ा है। गुरुग्राम में एक बेहतर ऑडिटोरियम की जरूरत है। रंगमंच की कमी को कलाकार शिद्दत से महसूस करते हैं।
- शिखा गुप्ता, निदेशक कलाग्राम
1970 से रंगकर्म कर रहा हूं। यहां कोई सरकारी हॉल थियेटर कर्मियों के लिए नहीं है। अपने घर की छत पर ही थियेटर बना दिया। वहां पिछले 15 साल से नाटक करवा रहा हूं। इसमें रंगकर्म, फिल्म के लिए कलाकारों की ट्रेनिंग भी हो रही है।
- महेश वशिष्ठ, निदेशक, वरिष्ठ कलाकार
गुरुग्राम मेंं थियेटर के लिए बेहतर माहौल नहीं है। पिछले दिनों मैंने ओथेलो, बाबू भाई बिगड़ गए, मौत क्यों रात भर नहीं आती आदि नाटक किया है। जब ग्रुप बन जाता है तो लगातार काम होते हैं। सरकार को कलाकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह मेरी दूसरी इनिंग है।
- मोहनकांत, वरिष्ठ कलाकार