पर्यावरण संरक्षण के लिए डिस्पोजल के प्रयोग पर निर्भरता को कम करने के लिए कर रहे जागरुक
-अपील-सिंगल यूज प्लास्टिक की बजाए कार्यक्रमों में करें स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल
दिनेश देशवाल
नूंह। पर्यावरण का संरक्षण करना आज पूरे समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है। सभी कहते तो है कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए, लेकिन जब खुद का नंबर आता है तो पीछे हट जाते है। लेकिन नूंह शहर के कुछ युवाओं ने इस मामले में एक बड़ी पहल की है। जो न केवल पर्यावरण की दृष्टि से बेहद कारगर होगी, बल्कि लोगों के खर्चे को भी कम करेगी। नूंह शहर के कुछ युवाओं ने नूंह बर्तन बैंक बनाया है। जिसमें उन्होंने 1000 स्टील की थालियां तथा 500 गिलास खरीदे है। इनका प्रयोग किसी भी सामाजिक कार्यक्रम या निजी कार्यक्रम में किया जा सकेगा। यह सेवा निशुल्क रहेगी।
बता दें कि इन दिनों शादी, ब्याह, रस्म पगड़ी, मंदिरों पर भंड़ारे, जन्मदिन की पार्टियों व अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पानी के गिलास, दोना, प्लास्टिक या थर्मोकोल की प्लेटें खूब प्रयोग की जाती है। प्रयोग के बाद इन्हें निष्पादित करना एक बड़ी चुनौती रहती है। यदि इन्हें जलाएं तो यह पर्यावरण को बहुत अधिक प्रदूषित करती है और यदि जमीन में दबाएं तो जमीन को बंजर कर देती है। साथ ही इन्हें बनाने में भी बहुत अधिक पर्यावरण का हनन होता है। जो सीधेतौर पर हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में इनके प्रयोग को कम करने के लिए नूंह बर्तन बैंक के संयोजक राजू शर्मा, पंकज, मनोज गर्ग और भंवर सिंह ने बताया कि वे लगातार पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करेंगे और उन्हें प्लास्टिक के अधिक प्रयोग करने से रोकने का प्रयास करेंगे।
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दुर्गा अष्टमी से होगी शुरुआत
: बर्तन बैंक वाले युवाओं ने बताया वे इस अच्छी पहल का शुभारंभ आज शनिवार को नूंह के पास बडौजी गांव के ऐतिहासिक माता मनसा देवी मंदिर पर आयोजित होने वाले दुर्गा अष्टमी के मेले से करेंगे। इस मेले में जो भक्त भंड़ारा लगाएंगे, उन्हें बर्तन बैंक की तरफ से स्टील की थालियां व गिलास उपलब्ध करवाए जाएंगे तथा मेले में जो रेहडी-ठेले वाले होंगे उनसे भी आग्रह किया जाएगा कि वे प्लास्टिक के दोने की बजाए पत्ते वाले दोने तथा प्रसाद के लिए पॉलिथीन की बजाए कागज के लिफाफे का प्रयोग करें। इसके लिए भी 5000 हजार पत्ते वाले दोने तथा 1000 हजार कागज के लिफाफे खरीदे गए है। इस मेले को पूरी तरह से इको फ्रेंडली तरीके से आयोजित करते हुए प्लास्टिक के इस्तेमाल के बिना आयोजित किया जाएगा।
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इस पहल से लोगों को जोडेंगे
: पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरु की जा रही इस पहल से सभी लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। नूंह शहर के साथ गांव देहात में भी बर्तन बैंक से बर्तन उपलब्ध करवाए जाएंगे। ताकि सभी लोग इस मुहिम में अपना योगदान देकर पर्यावरण प्रदूषण का कम करने में अपनी भूमिका निभा सकें।
-राजू शर्मा
विवाह-शादी व अन्य सामाजिक आयोजनों में पुराने समय में टेंट वाले से पानी के स्टील वाले गिलास मंगवाए जाते थे। लेकिन आज घर में दो मेहमान भी आ जाए तो उनके लिए दुकान से ठंड़ा की बोतल के साथ प्लास्टिक के गिलास लेकर आते है और ठंड़ा पिलाते है। आज लोग सिंगल यूज प्लास्टिक की तरफ इतनी तेजी से बढ़ रहे है कि घर के लोग भी स्टील या कांच के गिलास की बजाए प्लास्टिक के गिलास का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे है।
- मनोज गर्ग।
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कार्यक्रम के आयोजन में हजारों रुपए की सिंगल यूज वाली प्लास्टिक की क्रोकरी इस्तेमाल की जाती है। जबकि इसके स्थान पर स्टील के गिलास, चम्मच, कटोरी युक्त थाली का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान होगा। यदि कार्यक्रम में बर्तन साफ करने वाले दो मजदूर अतिरिक्त लगा लिए जाएं तो मेजबान का प्लास्टिक क्रोकरी का हजारों रुपए भी बचेगा, मजदूर को रोजगार मिलेगा और वह पर्यावरण संरक्षण में अपना बड़ा योगदान भी देगा।
- पंकज नूंह।
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नूंह बर्तन बैंक बनाने के पीछे का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों की सिंगल यूज प्लास्टिक की निर्भरता को कम करना है। लोग यदि इसी प्रकार से प्लास्टिक का इस्तेमाल करेंगे तो आने वाले समय में उनकी पीढियां बीमारियों से जूझेंगी। आजकल देखने में आता है कि कार्यक्रम स्थल पर कई दिनों बाद भी पानी के गिलास, प्लास्टिक की चम्मच व दोना पड़े रहते है, जो बीमारी को भी बढ़ावा देते है।
-भंवर सिंह।