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Gurugram News: अवैध निर्माण का खतरा चिंताजनक, नियंत्रण न होने पर विनाशकारी परिणाम

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जिला अदालत ने चिंता जाहिर की, कहा-पोर्टल पर वैध दिखना काफी नहीं
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अवैध निर्माण में काटा बिजली कनेक्शन बहाल करने की मांग वाली याचिका खारिज

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में बढ़ रहे अवैध निर्माण पर जिला अदालत ने अपनी चिंता जाहिर की है। अदालत ने अवैध निर्माण में काटे गए बिजली कनेक्शन को बहाल करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गुरुग्राम में अवैध निर्माण का खतरा चिंताजनक स्तर पर बढ़ रहा है। इसको अभी नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने दिल्ली में इमारत ढहने वाले मामले से जोड़कर कहा कि इससे इमारतों का गिरना और अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त किए बिना निर्मित इमारतों में आग लगना जैसे जानमाल का नुकसान हो सकता है। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन शिवानी राणा की अदालत ने दिया है।

नेहा कुमारी ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने अशोक विहार फेज-1 में जून 2025 में एक फ्लैट खरीदा था। उनका कहना है कि नियमित रूप से बिजली बिल और नगर निगम टैक्स का भुगतान किया जा रहा था। नगर निगम वेबसाइट पर उनकी प्रॉपर्टी वैध दिखा रहा है, जबकि जून 2026 में बिजली विभाग ने नगर निगम की सिफारिश पर उनके फ्लैट का बिजली कनेक्शन काट दिया। निगम की तरफ से दलील दी गई कि भवन बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। निगम ने भवन को सील भी किया था। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल प्रॉपर्टी टैक्स भरने या पोर्टल पर स्टेटस वैध दिखने से कोई अवैध निर्माण कानूनी नहीं हो जाता। टैक्स केवल मौजूदा क्षेत्र और स्थिति के आधार पर लिया जाने वाला एक वित्तीय शुल्क है।
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ढिलाई बरते वाले निगम कर्मियों पर कार्रवाई के दिए आदेश
अदालत ने इस मामले में सिर्फ याचिका को खारिज नहीं किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा नहीं था कि विभाग को पता ही नहीं था कि कोई गैर कानूनी निर्माण किया गया है। नगर निगम को 2021 से ही इस गैर कानूनी निर्माण के बारे में पता था, जब मूल मालिक सुशीला को पहला नोटिस जारी किया गया था। 2021 में ही इसे गिराने का आदेश जारी कर दिया गया था, लेकिन फिर भी विभाग ने इसे नहीं गिराया, जबकि भवन पर लगाई गई सील तोड़ दी थी। आगे भी निर्माण जारी रखा था। सुशीला उन फ्लैटों को बेचने में भी सफल रहीं। नगर निगम इसको आसानी से रोक सकता था। अगर विभाग ज्यादा सतर्क रहता और सब-रजिस्ट्रार को कोई भी सेल डीड रजिस्टर न करने के लिए सूचित करता या खुद जरूरी कार्रवाई करता जो गिराने का आदेश पारित होने के बावजूद नहीं की गई। 2026 तक विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न करना, विभाग के अधिकारियों की ऐसी गैर कानूनी निर्माण के खिलाफ कुछ न करने की मंशा को साफ दिखाता है। इस चुप्पी और व्यवहार के दूरगामी परिणाम होते हैं क्योंकि मासूम खरीदार, जिन्हें ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों के बारे में बहुत कम या कोई जानकारी नहीं होती, वे प्रॉपर्टी इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि वह आसानी से उपलब्ध होती है और उनके बजट में होती है-खासकर गुरुग्राम जैसी जगह पर जहां प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं। हैरानी की बात है कि 2023 में फिर से खाली करने का नोटिस जारी किया गया, लेकिन तब भी विभाग ने 2026 तक कुछ नहीं किया। अदालत ने निगम आयुक्त को आदेश दिया है कि जिन अधिकारियों ने नगर निगम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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