विभाग ने बालवाटिका से संबंधित पाठ्यक्रम, किताब या किट नहीं भेजी
बच्चों के शिक्षा और बौद्धिक स्तर में कैसे हो सुधार, नहीं मिला छोटे बच्चों को गृह कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में तीन से छह साल तक के बच्चों के लिए बालवाटिका शुरू की गई है। छोटे बच्चों को खेल-खेल में अक्षर, शब्दों व आंकड़ों की पहचान सिखाई जानी है। नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों की बुनियादी नींव को मजबूत करने के लिए बालवाटिका योजना चलाई गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर बालवाटिका योजना पर विभाग की ओर से कार्य नहीं किया जा रहा है। बालवाटिका से संबंधित न कोई पाठ्यक्रम, न पुस्तक और न ही कोई किट शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई है।
बालवाटिका में पढ़ाने वाले शिक्षकों को स्पष्ट जानकारी नहीं है कि बच्चों को खेल-खेल में क्या पढ़ना है और कहां तक बौद्धिक स्तर पर उसका विकास करना है। गुरुग्राम के 365 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में बालवाटिका शुरू की गई है, इनमें तीन से छह साल तक के लगभग 2100 बच्चों को दाखिले दिए गए हैं। ऐसे में शिक्षकों के समक्ष सवाल है कि बालवाटिका में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को जून माह में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान क्या गृह कार्य दें। वहीं, पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को शिक्षकों ने अब तक पढ़ाए पाठ्यक्रम से ही गृह कार्य की जानकारी कक्षा के लिए बनाए व्हाट्सएप ग्रुप व अभिभावकों के व्हाट्सएप पर भेज दिया गया है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ गुरुग्राम के जिला संरक्षक दुष्यंत ठाकरान का कहना है कि बालवाटिका के लिए विभाग को पाठ्यक्रम तैयार कराकर किताबें उपलब्ध करानी चाहिए। किताबें नहीं होने के कारण कक्षाओं में बच्चों को अच्छे ढंग से नहीं पढ़ाया जा सकता। गर्मियों की छुट्टियों के लिए भी बच्चों को कोई गृहकार्य नहीं दिया गया।
बालवाटिका के लिए किताब या पाठ्यक्रम नहीं
बालवाटिका के लिए शिक्षकों को सिर्फ प्रशिक्षण दिया गया था, लेकिन बालवाटिका में पढ़ने वाले बच्चों के लिए न कोई सिलेबस, न कोई पुस्तक और न ही कोई किट भेजी है। जबकि हर कक्षा का तय मानक व पाठ्यक्रम होता है, जिसमें कक्षानुसार बच्चे का बौद्धिक स्तर का विकास किया जाता है। बालवाटिका के बच्चों के लिए किताबें या पढ़ाई संबंधी सामग्री न होने के कारण इनकी नींव कमजोर हो सकती है। बालवाटिका प्रथम वर्ग में तीन से चार साल तक के बच्चों, बालवाटिका द्वितीय में चार से पांच साल तक के बच्चों और बालवाटिका तृतीय में में पांच से छह साल तक के बच्चों का दाखिला दिया जाता है।
वर्जन
बालवाटिका योजना के तहत छोटे बच्चों को खेल-खेल में अक्षरों का ज्ञान और शब्दों व आंकड़ों की पहचान करना सिखाया जा रहा है। बालवाटिका के बच्चों को पढ़ाने के लिए प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया था। विभाग द्वारा बालवाटिका के लिए पाठ्यक्रम या किताबें तैयार नहीं की गई हैं। - मुनिराम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, गुरुग्राम।