अवांछित लाभ लेने के लिए कानून का दुरुपयोग, उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को दी चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा पॉलिसी खत्म होने पर रुपये वापस करने की याचिका को उपभोक्ता आयोग ने खारिज करते हुए कड़ी निंदा की है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह याचिका अवांछित लाभ लेने के लिए दायर की गई है। शिकायतकर्ता को चेतावनी भी दी गई है कि भविष्य में इस तरह का व्यवहार वह न करें। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
गांधी नगर निवासी सुंदर लाल ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उनके पास रमेश कुमार पाल और विरेंद्र ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी बताकर संपर्क किया था। कर्मचारियों ने कहा कि वह सेवानिवृत्त फौजी ऐसे में उन्हें बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए। उन्होंने 50 हजार रुपये का चेक 20 जून 2012 को दे दिए। इसके बाद दूसरा चेक उन्होंने 30 मार्च 2014 को दिया। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने पॉलिसी के लिए रुपये जमा करने के लिए दोबारा से संपर्क नहीं किया। वह शाखा पहुंचे तो वहां पर उन्होंने बताया कि वह पॉलिसी नहीं लेना चाहते हैं। ऐसे में उनके रुपये वापस किए जाएं। आयोग ने दस्तावेज के आधार पर कहा कि उन्होंने एसबीआई की शुभ निवेश पॉलिसी में निवेश किया था। 20 जून 2012 को 50 हजार रुपये देने के बाद उन्हें जून 2013 में रुपये देने थे लेकिन उन्होंने नहीं दिए। इसके बाद उन्होंने जून 2014 में राशि दी। कंपनी की तरफ से उन्हें सूचना दी गई कि देरी से रुपये देने पर उन्हें ब्याज देना होगा जोकि उन्होंने नहीं दिया। ऐसे में उनकी पॉलिसी को खत्म कर दिया गया। शिकायतकर्ता को सभी तथ्यों की जानकारी थी।