पुरानी झाड़सा की रामलीला में कायम है पुरानी संगीतमय परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में बसे गांवों की सबसे पुरानी रामलीला झाड़सा की है। झाड़सा गांव के तालाब से शुरू हुई रामलीलाएं अब पांच हिस्सों में बंट गई हैं। इनमें पुरानी झाड़सा रामलीला कमेटी, नई रामलीला कमेटी, श्रीकृष्ण मंदिर रामलीला कमेटी, रामचरित मानस रामलीला कमेटी और श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी की रामलीला शामिल है। पुरानी झाड़सा की रामलीला अब बख्तावर भवन के कम्युनिटी सेंटर में आयोजित की जा रही है। यहां पुरानी परंपरा अभी भी बरकरार है।
इस रामलीला में वाद्य यंत्रों से संगीतमय रामलीला का मंचन होता है। कलाकार सादगी से मानस को जीवंत करते है। पुरानी रामलीला कमेटी ने रामचरित मानस को आधार बनाकर तैयारियां की है। रामलीला के मुख्य पात्र कई सालों से भूमिकाएं निभा रहे हैं। 22 सितंबर से 2 अक्तूबर तक मंचन रात नौ से 12 बजे तक चलेगा। रामलीला में श्रीराम की भूमिका राहुल हुडा, लक्ष्मण की भूमिका विपुल, हनुमान की भूमिका अजय ठाकरान और रावण की भूमिका विनोद ठाकरान निभाएंगे। रामलीला कमेटी पुरानी झाड़सा के प्रधान हुक्त सिंह ठाकरान, मुख्य सचिव जगबीर सिंह ठाकरान, कोषाध्यक्ष रणवीर सिंह ठाकरान और निदेशक सत्यनाराण अत्रि है।
हमने अपनी पुरानी परंपरा को बनाए रखा है। यहां रामलीला रामचरित मानस पर आधारित होती है। संगीतकार और पात्र लंबे समय से रामलीला को सरस और सुंदर बनाने में पूरा योगदान देते आ रहे हैं। - हुकुम सिंह ठाकरान, प्रधान
शहर की सबसे पुरानी रामलीला हमारी है। इस रामलीला के झाड़सा गांव के लोग शामिल होते हैं। दो अक्तूबर को रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ रामलीला संपन्न होगी।
- सत्यनारायण अत्रि , डायरेक्टर