उपभोक्ता आयोग से - 2015 को हुआ था फ्लैट का करार, 2019 में मिलना था पजेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। फ्लैट का पजेशन न देने पर हिंदुस्तान फाइबर्स बिल्डर कंपनी को खरीदार को 36.23 लाख रुपये नौ प्रतिशत के ब्याज दर से वापस करना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
सेक्टर-9ए निवासी आशीष वाधवा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि हिंदुस्तान फाइबर्स ने राजस्थान के जिले भिवाड़ी में विकसित की जा रही प्रेसिडेंसी एस्टेट प्रोजेक्ट में एक फ्लैट 2015 में बुक किया था। कंपनी से फ्लैट के लिए 42.69 लाख रुपये में करार हुआ था। चार नवंबर 2015 को 4.43 लाख रुपये दे दिए थे। इसके बाद उन्होंने हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) से 36.23 लाख रुपये का लोन लिया गया। लोन को लेकर खरीदार, बैंक और बिल्डर के बीच में एक करार हुआ था। करार के अनुसार, बिल्डर से जब भी रुपये मांगे जाएंगे तो बैंक उन्हें दे देगा। बिल्डर ने आश्वासन दिया था कि एक मई 2019 तक फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा लेकिन दिसंबर 2024 तक भी उन्हें पजेशन नहीं दिया गया।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बिल्डर कंपनी के साथ ही बैंक को भी दोषी माना है। उन्होंने कहा कि पजेशन मिलने तक बैंक की किस्त पर ब्याज बिल्डर को देना था लेकिन उनसे नहीं लिया गया। आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया है कि 36.23 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये भी दिए जाएं।