नकली इंजेक्शन की खेप का मामला... सोसाइटी के फ्लैट में छानबीन, पैकेजिंग मशीनें बरामद
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नकली इंजेक्शन बनाने की फैक्ट्री के मामले में नया खुलासा हुआ है। आरोपी नकली इंजेक्शन के लिए चीन से रॉ ड्रग्स गाता था। ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारी अमनदीप चौहान ने बताया कि सोमवार को जांच टीम सेक्टर-62 स्थित सोसाइटी पिवटल पैराडाइज में पहुंची थी। यहीं रॉ ड्रग्स में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार किया जाता था। इसके बाद बारकोड, लेबलिंग और पैकेजिंग का पूरा काम भी इसी सोसाइटी के एक फ्लैट में होता था। टीम ने फ्लैट से पैकेजिंग मशीनें भी बरामद की हैं।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नकली और असली इंजेक्शनों की लेबलिंग में बहुत मामूली अंतर है। लेकिन आम नागरिक के लिए इसमें फर्क करना मुश्किल है। ये इंजेक्शन बिल्कुल हुबहू बनाए जा रहे थे। इस मामले की जानकारी एली लिली कंपनी को भी दी जा रही है। टीम अब तक पूरे मामले में मुख्यारोपी अवि शर्मा समेत अन्य आरोपी मुज्जमिल को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
टीम ने बताया कि देशभर में इस कंपनी के इंजेक्शनों को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। साथ ही बैच नंबर भी साझा किए गए हैं, ताकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें सतर्क रहें और नकली इंजेक्शनों को पकड़ सकें। पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि नकली इंजेक्शन कहां-कहां सप्लाई किए जाते थे और रैकेट में कितने लोग शामिल हैं। बता दें कि रविवार को ड्रग्स कंट्रोल विभाग की टीम ने डीएलएफ फेज-4 में एक गाड़ी से 70 लाख रुपये के नकली इंजेक्शनों की खेप बरामद की थी।
शुगर की बीमारी और वजन कम करने के लिए होता है इस्तेमाल
यह इंजेक्शन इटली से भारत आयात होता है। इसका उपयोग शुगर की बीमारी में होता है, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर इसे वजन घटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। नकली इंजेक्शन के इस्तेमाल से एलर्जी, चेहरे पर सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय में लीवर की गंभीर बीमारियां भी पैदा हो सकती है।