गुरुग्राम। चोरी के आरोप में डीएलएफ फेज-1 थाने के अंदर असम मूल की घरेलू सहायिका के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कि गई बर्बरता के बाद पीड़िता अब अस्पताल में इलाज के लिए संघर्ष कर रही है। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में गंभीर हालत में दाखिल पीड़िता का 24 घंटे बाद भी उचित इलाज नहीं किया जा रहा। पीड़िता के भाई का आरोप है कि पुलिसकर्मी जांच के नाम पर बार-बार आकर अस्पताल में पूछताछ कर रहे है। जिससे वे काफी सहमे हुए हैं। उन्होंने डॉक्टरों पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।
बृहस्पतिवार को अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में दाखिल पीड़िता ने रोते हुए बताया कि बुधवार को उसे अस्पताल में दाखिल किया गया उसके बाद से इलाज के नाम पर डॉक्टर महज खानापूर्ति कर रहे है। मैं दर्द से तड़प रही हूं। डॉक्टरों से कई बार इलाज के कहने पर भी वे आ नहीं रहे है, मेरा दर्द के मारे बुरा हाल होते जा रहा है। पीड़िता के भाई ने बताया कि बुधवार को अस्पताल में दाखिल होने के बाद डॉक्टर ध्यान नहीं दे रहे है। पूरी रात मेरी बहन दर्द से कराहती रही लेकिन डॉक्टर नहीं आए। मेडिकल कराने की गुहार लगाने के बावजूद 24 घंटे से पीड़िता का एक्सरे तक नहीं किया गया है। दो दिनों से हमारे पास पूछताछ के नाम पर कितनी बार पुलिसकर्मी आ चुके है। अब तो हमें डर लगने लगा है। बहन के निजी अंगों पर बुरी तरह चोट मारी गई है ऐसे में अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो चोट गंभीर हो सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस से पीड़िता का समय रहते इलाज कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
डीएलएफ फेज-1 थाने में चोरी के मामले में असम मूल की 30 वर्षीय महिला के साथ थाना प्रभारी निरीक्षक सवित कुमार, महिला एएसआई मधुबाला, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार और महिला कांस्टेबल कविता ने नौ घंटे तक हिरासत में रखते हुए बर्बरता पूर्वक तरीके से महिला के साथ मारपीट की। आरोप है कि उसके निजी अंगों पर बुरी तरह से मारपीट करते हुए उसे मुर्गा तक बनाया गया। बुधवार को इस पूरे मामले के खुलासे के बाद पुलिस आयुक्त ने शुरुआती जांच के बाद महिला एएसआई मधुबाला और महिला कांस्टेबल कविता को सस्पेंड करते हुए बाकि दोनों को लाइन हाजिर कर दिया था।
पूरी रात दर्द के बावजूद अस्पतालों के चक्कर काटती रही पीड़िता
मंगलवार की रात 9.30 बजे पुलिसकर्मियों की ओर से अधमरी हालत में पीड़िता को उसके पति के हवाले करने के बाद वह उसे लेकर निजी अस्पताल में इलाज के लिए गए। पीड़िता के पति के मुताबिक गुरुग्राम के चार से पांच अस्पताल में चक्कर काटने के बावजूद दाखिल तो दूर उनकी पत्नी को इलाज तक नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अस्पताल में सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के लिए मना कर दिया। आखिरकार मंगलवार की देर रात को मिन्नत के बाद एक युवक ने दर्द निवारक इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद वह अपने पति के साथ कमरे पर आ गई। इस पूरी घटना के बाद पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। एसीपी उषा कुंडू के नेतृत्व में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकिल के मुताबिक आरोपी विभागीय जांच में दोषी पाए जाते है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।