-विकलांगता का अलग-अलग मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाकर सेवा वृद्धि का आरोप
स्कूल के प्रधानाचार्य ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर मांगा मार्गदर्शन
गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। उपमंडल के नवलगढ़ के राजकीय मिडिल स्कूल में टीजीटी विज्ञान के अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल विस्तार स्कूल में विवाद का कारण बना हुआ है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को भी मामले की जानकारी होने के बावजूद भी चुप्पी साधे हुए है। चार बार स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा उच्च अधिकारियों को मार्गदर्शन करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है लेकिन विभाग की ओर से स्कूल प्रधानाचार्य को कोई जवाब नहीं दिया गया है।
चौंकाने वाली बात ये है कि उक्त अध्यापक द्वारा सेवानिवृत होने से पहले विकलांग भत्ता लेने के लिए विभाग को भेजे गए दस्तावेजों में विकलांग प्रमाण पत्र 60 प्रतिशत का था, लेकिन सेवा विस्तार के आदेश पर कर्मचारी को 90 प्रतिशत विकलांग दर्शाया गया है। स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा महानिदेशक मौलिक शिक्षा अधिकारी पंचकूला, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नूंह, जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी सहित उपमंडल अधिकारी को पत्र लिखकर मार्गदर्शन के साथ साथ उक्त अध्यापक की दृष्टि बाधित के प्रमाण पत्रों की जांच के साथ साथ दोबारा से एम्स दिल्ली या पीजीआईएमएस चंडीगढ़ द्वारा आंखों की जांच कराने की मांग की है।
महानिदेशक मौलिक शिक्षा पंचकूला द्वारा 30 दिसंबर को जारी पत्र के आधार पर अध्यापक सुदेश कुमार के दो वर्ष 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए 90 प्रतिशत दृष्टिबाधित मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर सेवावृद्धि प्रदान की गई थी। जिसका मेडिकल प्रमाण पत्र पीजीआईएमएस रोहतक का दर्शाया गया है। इसके अलावा सीएमओ पलवल से जारी मेडिकल प्रमाण पत्र बोर्ड द्वारा 60 प्रतिशत जारी किया गया है। सीएमओ पलवल के मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नूंह के 26 नवंबर 2024 के आदेश अनुसार 60 प्रतिशत विकलांग के आधार पर विकलांगता भत्ता भी देने का आदेश दिया है।
स्कूल के प्रधानाचार्य का आरोप है कि दोनों प्रमाण पत्रों में अलग अलग विकलांगता दिखाकर उक्त अध्यापक द्वारा स्कूल व विभाग को गुमराह किया है। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दो वर्ष अध्यापक द्वारा बढवाए गए हैं। जबकि अध्यापक को पूर्ण रूप से दिखाई देता है। प्रधानाचार्य का कहना है कि उच्च अधिकारियों को लिखे पत्र में मार्गदर्शन मांगा है कि क्या इस प्रकार का दृष्टि बाधित अध्यापक स्कूल में सामान्य विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है व आंखों से अंधा अध्यापक विकलांगता भत्ता ले सकता है लेकिन विभाग की ओर से उन्हें जवाब नहीं दिया जा रहा है।
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मामला उनके संज्ञान मे है। स्कूल की ओर से मार्गदर्शन के लिए पत्र भी उन्हें मिला है। जल्द ही इस मामले का समाधान किया जाएगा।
वीरेन्द्र गुप्ता, खंड शिक्षा अधिकारी पुन्हाना।