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Gurugram News: गुरुग्राम से सोहना-पटौदी तक बढ़ेगा निगरानी नेटवर्क, लगेंगे 6400 कैमरे

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जीएमडीए की बोर्ड बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा प्रस्ताव
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण तीसरे चरण में 6400 सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना तैयार कर रहा है। पहले इस चरण में 10 हजार कैमरे लगाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन पुलिस विभाग की मांग के आधार पर इसमें बदलाव किया गया है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली जीएमडीए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। योजना के तहत गुरुग्राम के साथ सोहना, पटौदी, फर्रुखनगर और हेलीमंडी क्षेत्र में भी निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
जीएमडीए शहरव्यापी सीसीटीवी सर्विलांस नेटवर्क के पहले और दूसरे चरण पर पहले से काम कर रहा है। पहले चरण में 218 जंक्शनों पर 1200 कैमरे लगाए गए हैं। इनसे यातायात नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने में पुलिस को मदद मिल रही है। वहीं, दूसरे चरण में गुरुग्राम, मानेसर और विस्तारित क्षेत्राधिकार के 258 स्थानों पर 2722 अतिरिक्त कैमरे लगाए जा रहे हैं। दूसरे चरण में 1406 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर), 102 रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी), 74 पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड), 759 सामान्य निगरानी कैमरे, 347 फेस रिकग्निशन कैमरे और 20 स्पीड रडार लगाए जा रहे हैं। तीसरे चरण में प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को निगरानी के दायरे में लाने की योजना है। जीएमडीए का मुख्य सड़क नेटवर्क करीब 400 किलोमीटर में फैला है। योजना के तहत सड़कों पर लगभग हर 200 मीटर पर कैमरे लगाने की जरूरत होगी। नेटवर्क के लिए करीब 100 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल भी बिछानी होगी। जीएमडीए में स्मार्ट सिटी के प्रभारी डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि तीसरे चरण में करीब 6400 सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद
तीसरे चरण में सीसीटीवी आधारित सार्वजनिक सुरक्षा नेटवर्क, सर्वर रूम और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा। इससे पुलिस को अपराध रोकने, घटनाओं का पता लगाने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। बड़े आयोजनों के प्रबंधन और पुलिसिंग में भी यह नेटवर्क उपयोगी होगा। फिलहाल कई वारदातें ऐसे स्थानों पर होती हैं, जो मौजूदा कैमरों की निगरानी के दायरे से बाहर हैं। नए कैमरे लगने से प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ेगी। इसके साथ आपातकालीन सेवाओं में सहायता करेगी।
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