फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा मिड-डे-मील का फ्लेवर्ड दूध

विज्ञापन
विज्ञापन
गुरुग्राम। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील में फ्लेवर्ड दूध मिलना बंद हो गया है। ऐसे में अब विद्यार्थियों को सिर्फ चावल और गेहूं का सूखा राशन वितरित किया जा रहा है। दरअसल, कोरोना काल के दौरान स्कूल बंद कर दिए गए थे। ऐसी स्थिति में मिड-डे-मील बच्चों के घर पहुंचाया गया। वहीं, मई माह से निदेशालय ने बच्चों को मिड-डे मील के साथ मीठा फ्लेवर्ड दूध भी पहुंचाने की योजना बनाई।
विज्ञापन

इसके बाद मई से अगस्त माह तक चार महीने फ्लेवर्ड दूध पहुंचाया गया। इसके बाद सूखा दूध वितरण बंद कर दिया गया। हफ्ते में तीन दिन विद्यार्थियों को दूध की व्यवस्था की गई थी। प्रतिदिन बीस ग्राम के हिसाब से 250 ग्राम दूध का डिब्बा विद्यार्थियों को मुहैया कराया गया। वहीं, शिक्षा विभाग के आला अधिकारी पीछे से दूध की सप्लाई नहीं आने की बात कह कर टाल रहे हैं।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान दुष्यंत ठाकरान ने बताया कि सूखा राशन वितरण करने का काम शिक्षकों द्वारा किया जाता है। पिछले चार महीनों से सूखे दूध की सप्लाई बंद हैं। अभी सिर्फ चावल और गेहूं को वितरण किया जा रहा है।
विज्ञापन

इतना मिल रहा है राशन
प्राइमरी के विद्यार्थियों को 45 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से महीने में 25 दिन के हिसाब से 1.125 किलोग्राम गेहूं व 55 ग्राम के हिसाब से 1.375 किलोग्राम चावल मिल रहा है। वहीं 124.25 रुपये कुकिंग लागत भी मुहैया कराई जा रही है। अपर प्राइमरी के छात्रों को 1.687 किलोग्राम गेहूं व 2.063 किलोग्राम गेहूं के साथ 186.25 रुपये कुकिंग लागत घर पर पहुंचाई जा रही है।
स्कूल खुलने पर भी घर पहुंचेगा राशन
1 फरवरी से कक्षा छह से स्कूल खुल रहे हैं लेकिन विद्यार्थियों को मिड-डे-मील पूर्व की तरह घर-घर ही पहुंचाया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूल सिर्फ तीन घंटे के लिए खुलेंगे। ऐसे में सूखा राशन ही वितरण किया जाएगा।
मिड-डे-मील योजना में अभी फ्लेवर्ड दूध वितरित नहीं किया जा रहा है। इसकी सप्लाई सीधे शिक्षा निदेशालय द्वारा देखी जाती है। अभी सूखा राशन के तौर पर चावल और गेहूं पहुंच रहा है।
विज्ञापन

- प्रेमलता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें