वन विभाग ने निगम से मांगा लीगल लेटर, नहीं मिलने पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। वन विभाग ने के बालियावास अरावली वन क्षेत्र में वन्यजीव जलस्रोत के पास पाइपलाइन बिछाने के मामले में कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। विभाग ने इस संबंध में नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) से लीगल लेटर मांगा है। यदि पत्र में आवश्यक एनओसी नहीं मिलती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ फॉरेस्ट ऑफेंस रिपोर्ट (एफओआर) दर्ज की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, करीब चार साल पहले एमसीजी ने एक कॉन्ट्रेक्टर के माध्यम से एसटीपी प्लांट का निर्माण शुरू किया था। इसके लिए वन विभाग से उस समय अनुमति नहीं ली गई थी। हाल ही में पाइपलाइन बिछाने का मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संगठनों की चिंता बढ़ गई है। नियमों के तहत वन विभाग को 72 घंटे के भीतर चालान करना होता है। अब एमसीजी से लीगल लेटर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वन क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
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छोड़ा जाएगा शोधित पानी
एमसीजी के अधिकारियों के अनुसार, अरावली वन क्षेत्र में एसटीपी से छोड़ा जाने वाला पानी पूरी तरह ट्रीटेड होगा, जिससे जैव विविधता और वन्यजीवों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। साथ ही वन विभाग से आवश्यक एनओसी के लिए आवेदन पहले ही किया जा चुका है और अनुमति मिलने की प्रक्रिया जारी है।
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नगर निगम से लीगल लेटर मांगा गया है। नियमों के अनुसार 72 घंटे में चालान करना होता है। यदि लेटर में एनओसी नहीं मिलती तो चालान के साथ एफओआर दर्ज कर जुर्माना भी लगाया जाएगा। -
राज कुमार, वन विभाग अधिकारी
यह एसटीपी प्लांट चार साल पहले बनाया गया था। इसमें ट्रीटेड पानी वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे जैव विविधता और वन्यजीवों को कोई खतरा नहीं होगा, क्योंकि पानी पर्यावरण मानकों के अनुरूप शुद्ध किया गया है। -
कुलदीप, एसडीओ, नगर निगम गुरुग्राम