गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर क्लोवरलीफ के निर्माण के दौरान यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने खास रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत इसका निर्माण कई अलग-अलग फेज में किया जाएगा, ताकि यहां यातायात बदलाव (ट्रैफिक डायवर्जन) से एकदम वाहनों का दबाव न बढ़ पाए। यातायात बदलाव के लिए हाईवे के दोनों ओर (दिल्ली और जयपुर की तरफ अलग-अलग) तीन-तीन लेन बनाई गई है।
दोनों ओर एक-एक सर्विस रोड अलग से आरक्षित रखी गई है, ताकि अधिक दबाव होने पर उसका भी इस्तेमाल किया जा सके और जाम के हालत पैदा न हों। ट्रायल के दौरान जो दिक्कतें नजर आईं हैं, उन्हें भी दुरुस्त किया जा रहा है। हालांकि ट्रायल के दौरान ऐसी कोई बड़ी कमी नहीं मिली है, फिर भी बेहतर से बेहतर व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक निर्माण जंबूलकर ने बताया कि क्लोवरलीफ के हाईवे वाले हिस्से का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसका निर्माण पूरा होने में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। इतना लंबा समय वाहन चालकों की सहूलियत के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि हाईवे पर वाहनों का दबाव है, खासकर सुबह के सात से नौ और शाम के छह से आठ बजे तक वाहनों का ज्यादा दबाव रहता है। इसलिए एक खास रणनीति के तहत ही इस हिस्से में निर्माण कार्य किया जाएगा। दो सौ मीटर टुकड़े का एकबार में एकदम से निर्माण करने की बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में निर्माण किया जाएगा। इससे मुख्य सड़क से पूरा यातायात एकसाथ नहीं बदलना पड़ेगा। जरूरत के हिसाब से नई व्यवस्था और मुख्य सड़क से यातायात गुजारा जा सकेगा। जैसे-जैसे निर्माण होता जाएगा, वाहनों के लिए लेन बढ़ाते जाएंगे। यह प्रक्रिया पूरे छह महीने तक चलेगी।
पूरे एनसीआर का होगा जुड़ाव
क्लोवरलीफ के बनने के बाद पूरे एनसीआर का सीधा जुड़ाव हो जाएगा। सदर्न, नादर्न और सेंट्रल पेरिफेरल रोड यहां एक दूसरे को जोड़ेंगे। ये तीनों सड़कें एनसीआर के एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ती है। इसके साथ ही शहर के बाहरी हिस्सों से शहर के अंदरुनी हिस्सों का जुड़ाव आसानी से हो सकेगा।