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Gurugram News: फर्रुखनगर तहसील में सॉफ्टवेयर बना सिरदर्द

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तहसील फर्रुखनगर की  जर्जर इमारत । संवाद
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छह महीने से अटके इंतकाल, किसान से लेकर वकील सभी परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। सरकार के डिजिटल इंडिया और 10 दिन में इंतकाल के दावों की हवा निकालते हुए तहसील फर्रुखनगर का ऑनलाइन पोर्टल पिछले छह महीनों से आम जनता के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। बार-बार सॉफ्टवेयर बदलने और तकनीकी खामियों के चलते तहसील का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
दिनभर में बमुश्किल एक-दो घंटे चलने वाली इस साइट के कारण किसान, व्यापारी, वकील और डीड राइटर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हालात इतने बदतर हैं कि सांझे खेवट के इंतकाल महीनों पेंडिंग रहने से रजिस्ट्री कार्य रुक गए हैं, और नया छह पन्नों का अंग्रेजी इंतकाल किसानों की समझ से पूरी तरह बाहर है।
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95 प्रतिशत तक कार्य ठीक करा दिया गया है। आगामी सोमवार तक सॉफ्टवेयर पूरी तरह सही काम करने लगेगा। तहसील क्षेत्र फर्रुखनगर के सभी पटवारियों के ट्रांसफर हो गए हैं, नए पटवारियों को एडजस्ट करने में थोड़ा समय लग रहा है, जल्द ही व्यवस्था सुचारू हो जाएगी। - सज्जन कुमार, तहसीलदार

लोग थक गए चक्कर काट-काटकर

रोजाना साइट ठप रहती है। लोगों के 3-3 महीने से इंतकाल लंबित पड़े हैं। कोर्ट में केस लड़ना मुश्किल हो गया है। - निखिल सैनी, एडवोकेट, फर्रुखनगर
छह महीने से इंतकाल दर्ज नहीं हो रहा। अंग्रेजी में इंतकाल आता है जो समझ नहीं आता। जमीन बेचनी है, रजिस्ट्री नहीं हो रही, हम तो बर्बाद हो गए।- मोहर सिंह यादव, किसान, कारोला
सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, पर यहां डिजिटल सिस्टम ने ही काम ठप कर दिया है। इंतकाल में हिस्सा और रकबा तक स्पष्ट नहीं आता। - एडवोकेट अरुण यादव, डाबोदा
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ऑनलाइन में नाम ही नहीं आता, पटवारी कहते हैं चंडीगढ़ से डिलीट हो गया। किसान तहसील के चक्कर काट-काटकर थक गए हैं। पुराना सॉफ्टवेयर बहाल करना चाहिए। -मनोज यादव, एडवोकेट

तहसील फर्रुखनगर की  जर्जर इमारत । संवाद

तहसील फर्रुखनगर की  जर्जर इमारत । संवाद

तहसील फर्रुखनगर की  जर्जर इमारत । संवाद

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