कूड़ा-कचरा उठाने के काम की रंजिश रखते हुए वारदात को दिया था अंजाम
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पालम विहार क्षेत्र में कूड़ा-कचरा उठाने के काम की रंजिश रखते हुए युवक पर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने सात आरोपियों को दोषी करार दिया है। एडीजे सुनील कुमार दीवान की अदालत ने सभी दोषियों को सात-सात वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
07 अक्तूबर 2021 को पालम विहार थाने को शिकायत मिली कि झगड़े के दौरान मारपीट में घायल एक व्यक्ति को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने अस्पताल में पहुंचकर घायल के बयान दर्ज किए। पीड़ित ने बताया कि वह एक एनजीओ का अध्यक्ष है। वर्ष 2019 में एनजीओ ने नगर निगम गुुरुग्राम (एमसीजी) क्षेत्र में कूड़ा उठाने का ठेका लिया था। कूड़ा उठाने का ठेका एमसीजी ने वर्ष 2039 तक दे रखा था है।
वार्ड-2 पालम विहार एक्सटेंशन में नगर निगम पार्षद शकुंलता का परिवार कूड़ा उठवाने का काम करते हैं। जब पीड़ित ने पार्षद के द्वारा कूड़ा उठाने का विरोध किया तो नवीन नाम के युवक ने उसे धमकी दी और पिस्टल लेकर उसके कार्यालय में आया। बाद में नवीन ने माफी मांग ली और आपस में राजीनामा हो गया। इसके बाद नवीन ने उसे फिर से धमकी दी तो पीड़ित युवक ने सीएम विंडो पोर्टल पर शिकायत डाल दी। नवीन शिकायत वापस लेने की धमकी देने लगा।
इसके बाद 07 अक्तूबर 2021 को पीड़ित युवक अपने कार्यालय में मौजूद था तो इसी दौरान बाइकों पर सवार होकर आए करीब छह युवकों ने उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई करते हुए पालम विहार निवासी भारत भूषण उर्फ मनी व नवीन यादव काे, रोहतक के सांपला निवासी जगदीप नेनी व सतेंद्र को, झज्जर चारा पाना गांव निवासी के विक्की उर्फ कलिया उर्फ काला को और बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) कमालपुरा गांव निवासी शरजील उर्फ सोना व रियान उर्फ बबलू उर्फ मोना को गिरफ्तार किया। मामले में पुलिस ने जांच करते हुए आरोपियों के खिलाफ सभी आवश्यक साक्ष्य व गवाह एकत्रित करके अदालत में पेश किए।
अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट और पुलिस द्वारा एकत्रित किए गए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर एडीजे सुनील कुमार दीवान की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपियों को धारा 307 आईपीसी के तहत सात साल की कैद व 50 हजार रुपये का जुर्माना, धारा 120बी आईपीसी के तहत सात साल की कैद व 50 हजार रुपये का जुर्माना, धारा 323 आईपीसी के तहत छह माह की कैद व छह हजार रुपये का जुर्माना, धारा 325 के तहत पांच वर्ष की कैद व 25 हजार रुपये का जुर्माना व 506 आईपीसी के तहत दो वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है।