ज्यादातर जगहों पर प्रवेश और निकास द्वार एक ही, छतों पर जनरेटर और संकरे रास्ते बढ़ा रहे खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग ने एक बार फिर दिल्ली के कोचिंग सेंटर्स में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के बेरसराय, मुनिरका, जिया सराय, कटवारिया सराय, मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, उत्तम नगर, प्रीत विहार, यमुना विहार और बदरपुर जैसे इलाके वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बड़े केंद्र रहे हैं। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले हजारों छात्र रहते हैं, लेकिन इन इलाकों में मौजूद अनेक पीजी, हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों की स्थिति ऐसी है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक है। सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कागजों तक सीमित
दक्षिण दिल्ली का बेरसराय, मुनिरका, कटवारिया, और जिया सराय छात्रों का सबसे बड़ा ठिकाना माना जाता है। यहां पहुंचते ही हर तरफ कोचिंग संस्थानों के बोर्ड, पीजी और हॉस्टल के विज्ञापन दिखाई देते हैं। इलाके की ज्यादातर गलियां इतनी संकरी हैं कि दो कारों का एक साथ निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई इमारतें पांच से छह मंजिल तक ऊंची हैं, जबकि आसपास पर्याप्त खुली जगह नहीं है।
मुनिरका की स्थानीय निवासी रानी ने बताया कि पहले यहां परिवार रहते थे, लेकिन अब ज्यादातर मकान छात्रों के लिए पीजी में बदल गए हैं। मकान मालिकों के बीच ज्यादा से ज्यादा कमरे बनाने की होड़ लगी हुई है। वहीं, राजस्थान से आए छात्र नमन ने बताया कि जिया सराय में जब हमने कमरा लिया था तब किसी ने यह नहीं बताया कि बिल्डिंग में आग बुझाने के उपकरण है या नहीं। कई बार बिजली का इतना लोड हो जाता है कि पूरी बिल्डिंग अंधेरे में डूब जाती है। छात्रा नैना ने बताया कि अगर रात के समय आग लग जाए तो बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि एक साथ दो लोग नहीं निकल सकते।
कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल
पश्चिमी और पूर्वी दिल्ली में कई कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है। छात्रों ने बताया कि कई कोचिंग सेंटरों में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार है। अधिकांश इमारतों में खिड़कियां बंद रहती हैं और सीढ़ियां और गलियारे बेहद संकरे हैं। इतना ही नहीं, कुछ संस्थानों की छतों पर जनरेटर लगाए गए हैं, जिससे आग लगने या अन्य आपात स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। लोगों के अनुसार, किसी भी दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर भी अछूते नहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। यहां बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों में संचालित होते हैं। छात्रों के अनुसार, यहां आग कोचिंग संस्थानों की इमारत आसपास सटी हुई है। अगर एक इमारत में आग लगी तो सब इसकी जद में आएगी। मुखर्जी नगर में रहने वाले छात्र रमन ने बताया कि हमारे पीजी में पांच मंजिल हैं, लेकिन ऊपर जाने के लिए सिर्फ एक सीढ़ी है। आज तक कभी फायर ड्रिल नहीं हुई। गोरखपुर से आए छात्र अकुंश ने बताया कि हमारे एक कमरे में तीन-तीन छात्र रह रहे हैं। किराया कम रखने के नाम पर पीजी संचालक क्षमता से अधिक लोगों को रख लेते हैं। कई बार लगता है अगर आग लग गई तो बहुत नुकसान होगा।