सरस आजीविका मेले में दिखा रौनक, क्रोशिया से बनी चीजों ने जीता मन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-29 स्थित लैजर वैली पार्क में सरस आजीविका मेला अपनी पूरी रौनक पर है। हिमाचल प्रदेश की महिलाओं की ओर से क्रोशिया से बनाए गए ऊनी उत्पाद (जैसे खिलौने और सजावटी सामान) इस बार मेले का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के स्टॉल नंबर 187 के प्रेरणा सेल्फ हेल्प ग्रुप के संचालक में बताया कि एक-एक चीज को तैयार करने में करीब तीन दिन समय लगाता है। इससे क्रोशिया से बुना जाता है और आकार के देने के लिए रूई को भरते हैं। उनके स्टॉल पर ऊन से बनी चीजों के रेट 150 से लेकर तीन हजार रुपये तक है।
मदर केयरिंग रूम का भी इंतजाम
मेले में आने वाली न्यू मदर और शिशुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मदर केयरिंग रूम बनाया गया है। इस रूम में माताएं आराम से बच्चों को फीडिंग करा सकती हैं। यहां साफ-सफाई और बैठने की उचित व्यवस्था है। माताओं को मेले में घूमने के दौरान काफी सहूलियत मिल रही है और वे स्वयं को अधिक सहज महसूस कर रही हैं।
4 लाख रुपये की पश्मीना शॉल
मेले में इस बार कारीगरों की बेमिसाल कला और महीन हस्तशिल्प ने गुरुग्राम की जनता का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। मेले में 4 लाख रुपये की पश्मीना शॉल और 2 लाख 20 हजार रुपये तक की साड़ियों ने लोगों को हैरान भी किया और प्रभावित भी। यह लखपति दीदी पवेलियन भी आगंतुकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां आत्मनिर्भरता और सफलता की प्रेरक गाथाएं प्रस्तुत की जा रही हैं। कच्छ, गुजरात से आईं पानबाई बताती हैं कि 1,20,000 रुपये की मेरिनो वूलन शॉल तैयार की है। इस शॉल को दो कारीगर मिलकर हैंडलूम मशीन पर बुनते हैं और इसे तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगता है। इसी तरह 2,20,000 रुपये की कानी वीविंग साड़ी भी मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
मेले में ताजा हुई गांव की यादें
भारत के सभी राज्यों की संस्कृति एक साथ देखने के लिए मेला एक अनोखी पहल है। ऐसी जगहों पर बच्चों को जरूर घुमाना चाहिए और लुप्त चीजों जैसे चारपाई, मिट्टी, धान, धार्मिक चीजों को दिखाना और बताना चाहिए। - सीमा देवी
मेले में साथियों के साथ सामान लेने आई हूं। यहां घर सजाने के लिए सुंदर और मनमोहक सामान खरीदा है। मेले में विभिन्न उत्पाद देखने को मिला। साथ मेले में जगह जगह बने सेल्फी पॉइंट सबसे ज्यादा अच्छे लगे। - सुंदर
मेले में ग्रामीण चीजों को देखकर शांत और गांव की यादें ताजे हो गईं। मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मैंने मिट्टी से बनीं अनेक वस्तुएं खरीदी हैं। साथ लजीज भोजन को खाकर मजा आ गया। - मुनि देवी