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संतोष यूनिवर्सिटी के संचालक की जमानत याचिका खारिज

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गुुग्राम। कर्ज लेकर 35 करोड़ रुपये के गबन मामले में संतोष विश्वविद्यालय के संचालक डॉ. संतोष महालिंगम की जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। एडवोकेट प्रशांत यादव ने बताया कि एसीजेएम मनोज राणा की अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलील रखी। जिसकी सुनवाई के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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पुलिस के अनुसार संतोष यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर समेत अन्य पदाधिकारियों पर आरोप है कि मैसर्स एसीबी(इंडिया ग्रुप) की नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी से मार्च 2015 में 35 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। लेकिन तय समय पर कर्ज नहीं चुकाया गया। साथ ही जो प्रॉपर्टी गिरवी रखकर कर्ज लिया गया, उस पर पहले भी कर्ज ले रखा था। कंपनी ने समय पूरा होने पर कर्ज राशि वापस मांगी तो उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. पी महालिंगम, उनके बेटे व विश्वविद्यालय के डायरेक्टर डॉ. संतोष महालिंगम, संतोष ट्रस्ट और मैसर्स महाराज जी एजुकेशनल ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य डॉ. पुधुर मनिकम के अलावा शर्मिला आनंद आदि पर डीएलएफ फेज-3 थाना में एफआईआर दर्ज की है। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर डॉ. संतोष महालिंगम को गिरफ्तार कर 14 दिन तक पूछताछ की। जिसके बाद शुक्रवार 30 जुलाई को उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं संचालक के वकील की ओर से शुक्रवार को ही उनकी जमानत याचिका दायर की गई थी। इस मामले में दोनों पक्षों के वकील ने अपनी दलील रखी। जिसे सुनने के बाद अदालत की ओर से शाम को हुए फैसले में जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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