कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की तीन दिवसीय सांझी संरक्षण कार्यशाला शुरू
महिलाओं और युवतियों को पारंपरिक लोककला का दिया जाएगा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग ने सांझी संरक्षण अभियान के तहत तीन दिवसीय मंडल स्तरीय सांझी संरक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन है। सेक्टर-37 स्थित कला एवं सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित यह कार्यशाला 5 से 7 जून तक चलेगी। कार्यशाला का उद्घाटन विभाग की संयुक्त निदेशक रेणु हुड्डा तथा निदेशक केके गांधी ने किया।
इस अवसर पर रेणु हुड्डा ने कहा कि सांझी केवल एक पारंपरिक कला नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और आधुनिकता के प्रभाव के कारण नई पीढ़ी इस लोककला से दूर होती जा रही है। ऐसे में विभाग की यह पहल युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और लोक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न मंडलों में भी इसी प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से महिलाएं अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सांझी कला का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी और इस पारंपरिक विधा को आगे बढ़ाने में योगदान देंगी। कार्यशाला की प्रशिक्षक मंजू भाटिया और डॉ. मंजू बलहारा ने बताया कि सांझी हरियाणा की प्राचीन हस्तकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे महिलाएं और बालिकाएं प्राकृतिक रंगों, मिट्टी और गोबर की सहायता से तैयार करती हैं। सांझी शब्द का संबंध संध्या से माना जाता है और इसे देवी दुर्गा तथा स्त्री शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।