गुरुग्राम। विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान बढ़ाने के लिए रोबोटिक्स सिखाया जाएगा। इससे युवाओं को भविष्य में कौशल विकसित करने के लिए मदद मिलेगी। विद्यार्थियों में तकनीक के लिए दूरदर्शी सोच तथा उनकी आधुनिक एवं प्रायोगिक शिक्षण पद्धति के प्रति जुड़ाव होगा। रोबोटिक्स सीखने के बाद विद्यार्थियों में डिजाइन, निर्माण के साथ-साथ संचालन का कौशल और ज्ञान की क्षमता बढ़ेगी। रोबोटिक्स विद्यार्थियों के तकनीकी स्तर को बढ़ाकर किसी समस्या के लिए कुछ रचनात्मक समाधान खोजने में मदद करता है।
शिक्षा निदेशालय की ओर से आरंभिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के तहत राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूलों के छठी से 12 वीं कक्षा के विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा। अच्छे परिणाम सामने आने पर सभी राजकीय स्कूलों में इस परियोजना को लागू करने की तैयारी की जाएगी।
रोबोटिक्स सीखकर मिलेगा फायदा
रोबोटिक्स सीखने के बाद विद्यार्थियों को किसी भी तकनीक के उपकरण में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी मिलेगी। रोबोटिक्स सीख कर विद्यार्थी यांत्रिक और विद्युत विधियों के साथ सीधे संवाद करने में सक्षम होंगे। वहीं विभिन्न प्रकार के रोबोट बनाना सीखेंगे, जिसमें ब्लू टूथ कंट्रोल, वाई-फाई कंट्रोल, वॉइस कंट्रोल सहित अन्य तकनीक संबंधी उपकरण भी शामिल होंगे।
पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को तकनीक का ज्ञान होना भी जरूरी है। ऐसे में स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम के साथ ही तकनीकी शिक्षा को भी शामिल किया जा रहा है। रोबोटिक्स सीखने में विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा नई चीजों के बारे में जानकारी मिलेगी और तकनीकी शिक्षा में उनकी रुचि भी बढ़ेगी।
- डा.सुनील बजाज, उप निदेशक, एससीईआरटी गुरुग्राम