- जीएमडीए के नालों में गिर रहा सीवर का गंदा पानी
- सीवर के अवैध कनेक्शनों की पहचान में आ रही दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर की खराब सीवर व्यवस्था के कारण तीनों प्रमुख बरसाती नालों में गंदा पानी गिर रहा है। इनमें अधिकांश हिस्सा नगर निगम की कॉलोनियों और गांवों के सीवर का है।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के तीन प्रमुख बरसाती नाले हैं, जिनके माध्यम से बारिश का पानी नजफगढ़ ड्रेन होते हुए यमुना नदी तक पहुंचता है। जीएमडीए का प्रयास है कि नालों में बिना शोधित सीवर का पानी न जाए, लेकिन नगर निगम की कॉलोनियों और गांवों का गंदा पानी ड्रेनेज लाइनों में पहुंच रहा है। जीएमडीए ने कई अवैध सीवर कनेक्शनों को बंद कराया है। हालांकि, कई कनेक्शन भूमिगत होने के कारण उनकी पहचान करने में दिक्कत आ रही है। तीनों नालों में 100 एमएलडी से अधिक बिना शोधित पानी गिर रहा है। हाल में हुई क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड की बैठक में यह मामला उठा था। सदस्य सचिव योगेश कुमार ने नगर निगम की कालोनियों से जुड़े कनेक्शनों पर कार्रवाई करने को कहा था। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता व नोडल अधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि नालों की जांच कर अवैध सीवर कनेक्शनों को बंद कराया जा रहा है और नालों के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए अन्य विकल्पों पर भी काम चल रहा है।
बीओडी को 10 तक लाने का लक्ष्य
ड्रेनेज के पानी की बीओडी (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग) उस ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाती है, जो पानी में मौजूद जैविक गंदगी को सूक्ष्म जीवों द्वारा सड़ाने-गलाने में खर्च होती है। यानी बीओडी जितनी अधिक होगी, पानी उतना ही ज्यादा गंदा और प्रदूषित माना जाएगा। जीएमडीए ने नालों की बीओडी को 10 एमजी/ली तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नालों में अवैध रूप से गिर रहे सीवर के पानी को रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि, साफ नदी के पानी की बीओडी सामान्यतः 1 से 3 एमजी/ली होती है। वर्तमान में लेग-2 ड्रेन के पानी की बीओडी 120 एमजी/ली, लेग-3 की 90 एमजी/ली और लेग-1 की बीओडी भी 100 एमजी/ली से अधिक है।