पंचायत आरक्षित नहीं होने से सरपंच का चुनाव लड़ने वाले बेचैन
गुरुग्राम। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और पंचायत चुनाव का ऐलान कभी भी हो सकता है, मगर पंचायतों को आरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इस कारण पंचायत में सरपंच का चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके लो बेचैन हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें मालूम नहीं हो रहा है कि उनकी पंचायत किस श्रेणी में आएगी। दरअसल पंचायतों को महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं ओबीसी के लिए आरक्षित किया जाना है।
राज्य सरकार ने पंचायत के प्रस्तावित चुनाव के मद्देनजर गत जुलाई में पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और अनुसूचित जाति की आबादी के अनुसार ड्रा के माध्यम से जिले के चारों ब्लॉक गुरुग्राम, सोहना, पटौदी एवं फर्रुखनगर की पंचायत आरक्षित कर दी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव में ताल ठोंकने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा पंचायतों में ओबीसी को आठ प्रतिशत आरक्षण दे दिया। हालांकि पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था में परिवर्तन होने के बाद उन्हें उसके अनुसार आरक्षित नहीं किया गया है।
सरपंच का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है, लेकिन अभी तक पंचायतें आरक्षित नहीं हुई है। इस कारण उनके चुनाव लड़ने की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है।
- यजविन्द्र शर्मा गोगली, सरपंच, भोड़ाकला
सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए काफी समय से जुटे हैं। पहले तो हमारे गांव की पंचायत सामान्य की गई थी, लेकिन अब मालूम नहीं क्या होगा।
- पंकज शील यादव, सरपंच लोकरा
अभी पंचायतें आरक्षित नहीं हुई है। पंचायत सामान्य रहने की स्थिति में चुनाव लड़ने पर विचार किया जाएगा। वैसे चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है।
- राजेश यादव, निवासी, बलेवा
सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए तैयारी पूरी कर रखी है। पंचायतें आरक्षित होने का इंतजार किया जा रहा है। उम्मीद है कि उनके गांव की पंचायत सामान्य रहेगी।
- प्रवीण भारद्वाज, निवासी, महनियावास