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Gurugram News: खारिज किया गया क्लेम नौ प्रतिशत की दर से करना होगा वापस

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उपभोक्ता आयोग से
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12 जून 2020 में लग गई थी शिकायतकर्ता की गाड़ी में आग



संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम। गाड़ी में आग लगने के बाद दस्तावेज पूरा न करने पर खारिज किया गया 5.62 लाख रुपये का क्लेम अब कंपनी को ब्याज समेत देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सदस्य ज्योति सिवाच ने दिया है।



खुरमपुर गांव निवासी नवीन कुमार ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि 12 जून 2020 को दुकान से कार से घर जा रहे थे। इसी दौरान गाड़ी झटका खाकर बंद हो गई। अचानक से गाड़ी में धुआं निकलने लगा और आग लग गई। वह तुरंत ही गाड़ी से बाहर आ गए और इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। दमकल विभाग ने आग पर काबू पाया। गाड़ी पूरी तरह से जल गई थी। उन्होंने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन उन्हें क्लेम नहीं मिला।
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इस पर उन्होंने आयोग में शिकायत दी। कंपनी ने आयोग में बताया कि शिकायतकर्ता ने कंपनी की ओर से मांगे गए सभी दस्तावेज नहीं दिए थे। इसके चलते उन्हें क्लेम नहीं दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीमा कंपनी को 5.62 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस देने का आदेश दिया है। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी पर 50 हजार रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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महिला को दिया गया था सही उपचार, पति की याचिका खारिज



पति ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया था लापरवाही का आरोप



संवाद न्यूज एजेंसी



गुरुग्राम। सही उपचार न मिलने से हुई महिला की मौत की याचिका को उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया है। मामले की जांच के लिए जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों का एक बोर्ड भी बनाया गया था। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।



राज नगर निवासी कृष्ण कुमार ने आयोग में याचिका में बताया कि 17 अगस्त 2021 को उन्होंने पत्नी पूजा यादव को अस्पताल में ईएसआईसी अस्पताल में पेट दर्द होने पर भर्ती कराया था। उन्हें सर्जरी के लिए भर्ती कर लिया गया लेकिन वहां पर ठीक से उपचार न मिलने पर वह उन्हें दूसरे अस्पताल में ले गए। वहां पर उनके शरीर के पेट के निचले हिस्से में ज्यादा परेशानी होने पर सर्जरी की गई। उनको वेंटिलेटर पर भी रखा गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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अस्पताल की ओर से आयोग ने बताया कि मृतका की तीन बार पहले सिजेरियन डिलीवरी सर्जरी और एक बार गर्भपात कराया जा चुका है। इसके साथ ही अन्य सर्जरी हो चुकी थी। सात एक जनवरी को जिला चिकित्सा बोर्ड ने इस मामले में माना कि अस्पताल की तरफ से सही उपचार समय पर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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