गुरुग्राम। शहर और जिले के 7ए के दायरे में आने वाले गांवों में अवैध प्लाटों की रजिस्ट्रियां करने के मामले में चल रही जांच के बीच अब तहसीलदारों ने 7ए के दायरे से बाहर के गांवों में भी बिना डीटीपी प्रवर्तन की एनओसी के रजिस्ट्रियां बंद कर दी हैं। इसे लेकर इन गांवों के लोग परेशान हैं। डीटीपीई से मामले की शिकायत की है। इसके बाद डीटीपी प्रवर्तन ने तहसीलदारों को पत्र लिखकर गांवों में रजिस्ट्रियां करने का आग्रह किया है।
फर्रुखनगर तहसील एरिया के लोगों ने जिला नगर योजनाकार प्रवर्तन (डीटीपीई) से की गई शिकायत में बताया है कि उनके गांव डीटीपीई विभाग के 7ए दायरे से बाहर हैं, इसके बाद भी तहसीलदार उनसे प्लाटों की रजिस्ट्री के लिए डीटीपीई विभाग की एनओसी मांग रहे हैं। तहसीलदार को इसके लिए सरकार की ओर से नोटिसफिकेशन भी जारी हो चुका है।
इसके बाद भी वह नहीं मान रहे हैैं। शिकायतकर्ता जग्गी गुर्जर, महेंद्र, परमिंदर, राम बाबू, प्रदीप अहलावत आदि ने डीटीपी से मांग की गई कि बिरहेड़ा और फर्रुखनगर गांवों की रजिस्ट्री नहीं रोकी जाए। गौरतलब हो कि जिले के 166 गांव 7ए के दायरे में है। इसमें गुरुग्राम तहसील के 14, सोहना के 23, पटौदी के 04 फर्रुखनगर में 19, मानेसर में 36, वजीराबाद में 21, बादशाहपुर में 17, कादीपुर में 16 और हरसरू के 16 गांव शामिल हैं। डीटीपी ने तहसीलदारों को लिखे पत्र में जिक्र किया है कि इन 166 गांवो को छोड़ बाकी सभी में एनओसी के बिना ही रजिस्टी की जाए।
मार्च 2021 में हुआ था एक्ट में संशोधन
अर्बन एक्ट की धारा-7ए लागू इलाकों में नगर योजनाकार प्रवर्तन कार्यालय से एक एकड़ से कम जमीन की कोई भी रजिस्ट्री करने से पहले संबंधित जमीन की एनओसी लेना अनिवार्य होता है। प्रदेश सरकार की ओर से मार्च 2021 में वर्ष 2016-17 के दौरान अर्बन एरिया डेवलपमेंट एक्ट के नियम-7ए में संशोधन किया था। संशोधन के बाद प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग और नियमों के विरुद्ध जमीनों की रजिस्ट्री के मामले बढ़े। लॉकडाउन के दौरान गुरुग्राम में रजिस्ट्री घोटाला पकड़ा गया।
7ए दायरे के बाहर के गांवा में प्लाट आदि की रजिस्ट्री के लिए डीटीपीई विभाग की एनओसी की जरूरत नहीं है। तहसीलदारों को पत्र लिखकर वहां बिना एनओसी के ही रजिस्ट्री करने का आग्रह किया गया है। लोगों की शिकायत मिलने पर 7ए के दायरे में आने वाले गांवों की सूची भी पत्र के साथ भेजी गई है।
- आरएस बाठ, डीटीपीई