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Gurugram News: गुरुग्राम नहर के पुनर्निर्माण से दूर होगा पानी का संकट

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परियोजना को लेकर प्री-टेंडर बैठक हो चुकी है आयोजित, तकनीकी पात्रता मानदंडों और अन्य पहलुओं पर हुई चर्चा
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68.985 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्रेशराइज्ड एमएस पाइपलाइन बिछाई जाएगी


अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा सरकार का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग गुरुग्राम जल आपूर्ति (जीडब्ल्यूएस) नहर के री-मॉडलिंग और पुनर्निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। परियोजना को लेकर प्री-टेंडर बैठक आयोजित की जा चुकी है, जिसमें संभावित तकनीकी पात्रता मानदंडों और अन्य पहलुओं पर चर्चा की गई। सुझावों के आधार पर अब टेंडर जारी करने की तैयारी चल रही है।
प्रदेश सरकार गुरुग्राम में नहरी पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसके तहत सोनीपत के ककरोई से गुरुग्राम तक आने वाली मौजूदा नहर प्रणाली को पाइपलाइन आधारित व्यवस्था में बदला जाएगा। जीडब्ल्यूएस नहर का निर्माण वर्ष 1992 में 135 क्यूसेक क्षमता के साथ किया गया था। बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2006 में इसकी क्षमता 175 क्यूसेक कर दी गई थी। तीन दशक से अधिक समय तक संचालन के बाद नहर अपनी डिजाइन अवधि पूरी कर चुकी है। संरचनाओं के पुराने होने, लाइनिंग के क्षतिग्रस्त होने और रिसाव के कारण पानी की हानि बढ़ गई है, जिससे इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। इसी को देखते हुए नहर के पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित परियोजना के तहत करीब 68.985 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्रेशराइज्ड एमएस पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो ककरोई पंप हाउस से गुरुग्राम तक जाएगी।
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गर्मियों के दौरान बसई जल शोधन संयंत्र में पानी की कमी होने पर एनसीआर चैनल के माध्यम से चंदू-बुढ़ेरा से अतिरिक्त पानी लाना पड़ता है। मौजूदा गुरुग्राम नहर भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसी कारण इसकी क्षमता 175 क्यूसेक से बढ़ाकर 686.40 क्यूसेक करने की योजना बनाई गई है। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2050 तक की जल मांग को ध्यान में रखकर परियोजना का डिजाइन तैयार किया है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक जीएमडीए, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी, मेवात तथा अन्य एजेंसियों को अतिरिक्त 373.74 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी। यह मांग वर्ष 2040 में बढ़कर 496.53 क्यूसेक और वर्ष 2050 तक 686.40 क्यूसेक पहुंचने का अनुमान है।
इस परियोजना का उद्देश्य गुरुग्राम, मार्ग में पड़ने वाले कस्बों और गांवों को पर्याप्त एवं विश्वसनीय कच्चे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। परियोजना के लिए कंसल्टेंसी और परियोजना प्रबंधन सेवाओं (पीएमसी) की जिम्मेदारी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को सौंपी गई है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता मंजीत हुड्डा ने बताया कि पूरी नहर को पाइपलाइन प्रणाली में बदला जाएगा। प्री-टेंडर बैठक पूरी हो चुकी है और सुझावों के आधार पर जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।
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कई विभाग देंगे अंशदान
परियोजना के लिए विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय योगदान दिया जाएगा। इसमें जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पब्लिक हेल्थ) का लगभग 925 करोड़ रुपये, जीएमडीए का 700 करोड़ रुपये, एचएसआईआईडीसी का 180 करोड़ रुपये, एचएसवीपी का 150 करोड़ रुपये तथा पर्यटन विभाग का लगभग 20 करोड़ रुपये का अंशदान प्रस्तावित है।
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